ચારણત્વ

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શનિવાર, 10 ડિસેમ્બર, 2016

आई श्री सोनलमां प्रभाती : रचना :- दिलजीतभाई गढवी

✍🏾     

          *प्रभाती*
*आई श्री सोनल माँ मढडा*

राग..तूं तारे मन साचू मान..

मढडा वाळी आई अमाणी मन माग्या फळ आपती,(2)
मढठा वाळी आई....टेक..

भजन भाळी भावनू माडी वेगथी वारे आवती,
दूःख दाळीदर दोयला टाळी बाळक ने बचावती,
मढडा वाळी आई.....1

अंतर नादे याद करो त्यां एकज सादे आवती,
संकट माथी सौ सेवक ने चंडीका छोडावती,
मढडा वाळी आई.....2

उजळा मोढे ओरडा आपी नित नेह वरहावती,
वाडी वजीफा चडवा घोडी लाड छोरु ने लडावती,
मढडा वाळी आई......3

कोठिये कायम कण दयेने अखूट संपत आपती,
नित प्रभाते नाम जपे एना कृपाळू कष्टो कापती,
मढडा वाळी आई....4

दूध दहीं ना दिये दूजाणा मेखडियू मन भावती,
अष्ट सिध्धी अने नवे निध्धी ने नेहडां मां नचावती... .5

सूरज *सोनल* नाम नो उग्यो  अवनी ने उजाळती,
*दिलजीत बाटी* दिल थी भजू, तिमीर बधा टाळती,
मढडा वाळी आई......6

आई श्री सोनल मां मढडा नी वंदना.

दिलजीत बाटी ढसा जं.

*मो..99252 63039

सुर्य वंदना

कासब नंदण कापजो, आवे पिड जो अंग
जळ दोहो दई जोगडो, रांण नमां लख रंग

हे कास्यप पुत्र भगवान सुरज नारायण अमारी कोई अंग पीडायुं आवती होय तो तेने दुर करज्यो , आप तो लाखो रंग धरनार छो, (अहीं बपोरे त्रण वागे पिळा रंग धारी देखाता सुरज नारायण आपडा थी चार कलाक ना फेर वाळा देस मां उदय थता लाल रंग मां दर्शन आपता होय छे, आम एकज नारायण अलग स्थळे अने अलग लोको ने अनेक रंगो मां देखाय छे, मांणसे मांणसे पण अलग भाव रंग ना दर्शन आपता होई लख रंगा कह्या छे)हुं आपने दोहा रुपी जळ चडावी नित्य वंदन करुं छुं
🌅🌞☀🙏🏼☀🌞🌅

आई सोनल प्रार्थना

वदीयें एक ज वार, धर डगे न ध्रूजियें।
(मारी) वाणी नो वेवार, साचो राखजे सोनबाइ।

( है आइ सोनबाइ! मैं आप से प्रार्थना करता हुं की मैं जो भी बात एक बार बोल दुं, फिर धरती पलट जाने पर उससे मेरा मन चलित न हो।  है मां, मेरे इस वाणी रूप व्यवहार को आप हमेशा सत्य रखना)

-कवि: *जय*।
- जयेशदान गढवी।

શુક્રવાર, 9 ડિસેમ્બર, 2016

चरज नेटवर्क द्वारा "युवा चारण अभिव्यक्ति एेवोर्ड"

राजबाई रंगे रमे : रचना :- जोगीदान गढवी , चडीया

.                *|| राजबाई रंगे रमे ||*
.        *रचना: जोगीदान गढवी (चडीया)*
.                   *ढाळ:गरबी नो*

माना चुड़ला मां चंदर चमकाय, भेळीयो आभे भमे
मळी हारे मां आवड महमाय, राजबाई रंगे रमे..टेक

माडी छोरु नी करवा ने साय, धमणें व्रेमंड धमे
तारा गण केमे गणींया न जाय, राजबाई रंगे रमे..01

अमे बोलावी ज्यारे पण बाई, त्राड दईन आव्यां तमे
भीड पडतां तुं सामे भळाय, राजबाई रंगे रमे..02

तोळा दरशन थी दारीद दळाय, नवे खंड चरणे नमे
तुंतो भुख्या नुं भाथुं भणाय, राजबाई रंगे रमे..03

माडी चडीया नी जीभे चितराय, जोगीदान भेळी जमे
पछी कोळे ई सोळे कळाय, राजबाई रंगे रमे..04

तुंतो वायु ना रुपे रे वाय, पार कोंण तोळो पमे
मारा कुळ नो तुं सुरज कळाय, राजबाई रंगे रमे..05

जेना नेंणा मां हुती नबळाय, ई भुप कैंक रेढा भमे
ई रात कोई त्यां केमे रोकाय, राजबाई रंगे रमे..06

🙏🏼🙇🏻🙏🏼🙇🏻🙏🏼🙇🏻🙏🏼🙇🏻🙏🏼

ગુરુવાર, 8 ડિસેમ્બર, 2016

CGIF

ડિસેમ્બર ૮, ૨૦૧૬

સર્વ ચારણ બંધુ,
રાજા રુડાચ ના જય માતાજી,

આપણે અેક વાત નકકી કરવી પડશે કે કાં તો આપણે બધા   પોતાની જાત ને કોઇ અેક મકસદ  માટે સર્મપિત કરિ તેને યોગ્ય કામ કરવા પોતાના તરફ થી તૈયારી બતાવિયે અથવા પોતાની જાતને મકસદ વગર ના સમુહ થી દુર કરી લઇયે.

મારી શ્રધ્ધા સકારાત્મક  કામ કરવા માં છે. હું જોઇ રહ્યો છું કે આપણે વધુ પડતો સમય કોઇ મકસદ વગર પસાર કરિ રહયા છીઅે.  મારી વાત કદાચ આપને કળવી લાગસે પરંતુ આ સત્ય છે અને સત્ય કહેવુ તેમજ તેનુ પાલન કરવુ તેને હું મારો ધર્મ  માનું છુ.

મારો મકસદ છે CGIF ને સમાજ ના છેવાડા ના ચારણ સુધિ પહોચાડવુ જેથી ૧૦% ચારણ CGIF સાથે જોડાય. આના માટે પોતાનુ સુખ , સગવડ તેમજ સામાજિક પ્રતિષ્ઠા કે વ્યકિતગત મોભા કે માન  ની પરવાહ કર્યા વગર આ કાર્ય માં  સંપૂર્ણ શ્રધ્ધા થી કામ કરવુ.

મને ખબર છે કે આ કામ આસાન  નથી પરંતુ  ચારણે હમેંશા  અસકયતા ના વિચારો ઉપર ભગવતી ના ભરોસે  અમલ કર્યા છે. માં હમેંશા ચારણ ના સંકલ્પો ની લાજ રાખતી આવી  છે માટે આ કાર્ય મા રાખસે,  મારિ પાસે મારુ મકસદ છે , આપને પણ હું વિનંતી કરુ છું તમારો મકસદ નકકિ કરો,

જરુરિ નથી બધા નો વિચાર અેક હોય કે અેકજ મકસદ બધાને પસંદ પડે!!.

ઘણિવાર મકસદ માં કામયાબી નાં પણ ના મળે પરંતુ  તે પરિસ્થિતિ માં પણ તમારિ આત્મશુધ્ધિ નકકી છે.

મકસદ વિના ના જીવન  ની સફળતા કરતા અસફળ મકસદ સાથે નું જીવન વધુ સારું છે. પ્રમાણ માટે અસંખ્ય દ્રષ્ટાંત ઉપલબ્ધ છે.  🙏

રવિવાર, 4 ડિસેમ્બર, 2016

विविध जिल्लाओमां बेरोजगारो माटे भरती मेळा

विविध जिल्लाओमां बेरोजगारो माटे भरती मेळानुं  जिल्ला रोजगार कचेरी द्रारा आयोजन करवामां आवेल छे

जिल्ला वाइझ वधारे माहिती माटे ::- Click Here

सोनल संकल्प अभियान

.                  जय माताजी

*कोईपण पाप,पुण्य करो अे मात्र तमारे भोगववानुं होय छे. ज्यारे व्यसन ज अेवु छे के तमे करो ने तमारा परीवारने परीणाम भोगववु पडे छे.:- पु.बापु*

हाल आपडा  समाजना लोको ने व्यसन मुक्त बनाववा माटे  ने आपडा समाजना  घणा बधा भाई ओ महेनत करी रह्यया छे.
अे बधानी निस्वार्थ  समाज सेवाने वंदन छे.

आ दिशा मां आपडा समाजना अग्रणीओ , वडीलो, अने युवानोअे खास विचार करीने हजी पण महेनत करीने आपडा समाजने व्यसन मुक्त बनाववा माटे अेक कदम आगळ वधवुं जोईअे

आ माटे *सोनल संकल्प अभियान* चालु करेल छे.
आ अभियान मां आप सौने जोडाववा विनंती छे आप सौ आपनुं पोतानुं आ अभियान मानी ने आगळ वधशो तो आपडे जरुर एेक दिवस आपडा चारण समाजने 100% व्यसन मुक्त बनावी शकीछुं

आना माटे फेसबुक पर *सोनल संकल्प अभियान* नामनुं पेज बनावेल छे आ पेजने Like करवा नम्र विनंती छे..
*सोनल संकल्प अभियान*पेज Like करवा माटे निचेनी लिंक करशो :-
https://www.facebook.com/%E0%A4%B8%E0%A5%8B%E0%A4%A8%E0%A4%B2-%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%95%E0%A4%B2%E0%A5%8D%E0%A4%AA-%E0%A4%85%E0%A4%AD%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A8-560094880856097/

*तो आपडे सौ मळीने आई श्री सोनबाईमानां आदेशनुं पालन करीअे अने अेक व्यसन मुक्त चारण समाजनुं निर्माण करीअे*

            *वंदे सोनल मातरम्*

माधापरना युवा उधोगकारश्री भरतभाई गढवीने राष्ट्रीय एवॉर्ड

माधापरना युवा उधोगकारश्री भरतभाई गढवीने राष्ट्रीय एवॉर्ड





आई श्री सोनलमां चरच : रचना :- दिलजीतभाई गढवी

*आई श्री सोनल माँ मढडा*

          *चरज*
राग..विधी ना लखिया लेख ..

समरण करिये सोनल आई मनथी मावडी रे,
तारो तारो ने तत्काळ नोधारी नावडी रे,
समरण करिये .....टेक

नवखंड नाम गूंजे नेजाळी,
विघन हरजो विह भूजाळी,
ए वारु थाजो वड हथ वाळी
सोनल मावडी रे,....1

उठता बेहता सूता संभारु,
सपने सोनल मां ने भाळू ,
प्रभाते परथम छबी निहाळू
सोनल मावडी रे...2

अंतर नाम जपू एक धारु,
विचारे ऐकज आई विचारु,
माँ विण जगमां कोण छे मारु
सोनल मावडी रे.....3

गूरु मात पिता भीन भाई,
साची मां थी एक सगाई,
बेलु कायम रेजो बाई,
सोनल मावडी रे....4

माँ एम शबद सूणे ज्यां काने
आवी जाशे त्यां  अनूमाने,
मिस कोल करीतो जो तूं माने
सोनल मावडी रे....5

नरवो माँ  छोरु  नो  नातो,
*दिलजीत* हैया मां हरखातो
चरजू स्नेहे मानी गातो,
सोनल मावडी रे......6

माँ सोनल मढडा नी वंदना

दिलजीत बाटी ढसा जं.

*मो..99252 63039*

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