ચારણત્વ

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શુક્રવાર, 19 ઑક્ટોબર, 2018

आजे भावनगर राजकविश्री पिंगळशीभाई पाताभाई नरेलानी जन्म जयंति

आजे भावनगर राजकवि श्री पिंगळशीभाई पाताभाई नरेला नी 163 मी जन्म जयंती छे.


तो ते निमित्ते "भावनगर राजवि श्री पिंगळशीभाई पाताभाई नरेला"   विशे थोडी जाणकारी अने तेमनो जीवन परीचय  आप समक्ष मुकवानो नानकडो प्रयाश करेल छे


राजकवि = भावनगर

जीवन काळ ( 1856  - 1939 )


राजकवि श्री पींगळशीभाईनो जन्म सवंत 1912 ना आसो सुद अगीयारस ई.स.1856 मां 10 ओक्टोबर ना रोज  शिहोरमां थयो हतो


ते ओए  डिंगळ गुजराती , हिन्दी, चारणी ,  संस्कृत, व्रजभाषा,मारवाडी वगेरे भाषाओना जाणकार हता।


 नरेला कुटुंब भावनगर राज्यना सात  पेढी ना राजकवि पदे रहेला ।

दादा श्री मुळुभाई नरेला महाराजा भावसिंहजी अने अेखराजजीना वखतमां राजकवि हता ,

पिंगलशि भाय ना पिता पाताभाई नरेला पोते पण समर्थ कवि अने वार्ताकार हता ,

तेओ महाराजा जशवंतसिहजी अने अखेराजजीना समयमां राजकवि पदे रहेला


राज्यना दिवान " गगा ओझा " अने शामळदास महेता तेमना परम मित्रोमांना एक हता , आ मित्रो एेक बीजानी हाजरी वगर चा पण न पीता ,


भावनगर राज्यना दिवान शामळदास गुजरी गया पछी पिंगलशिबभाये चा पण छोडी दीधेली ,


पिंगलशिभाईए  श्री दलपतराम अने फार्बस साहेब साथे एक मास सूधी छावणीमां वास करीने भावनगरनो ईतिहास कहेलो,


महाराजा तख्तसिंहजीअे पाताभाई बाद पींगळशीभाईने राजकविनी पदवी आपेली तेओ भावसिंहजी अने कृष्णकुमारसिंहजीना समय सूधी आ पदे रह्या,


तेमणे रचेला पुस्तकोमां :- 

(1) हरिस ग्रंथ-संपादन 

(2) श्री कृष्ण बाळलीला

 (3) चित्तचेतावनी

 (4) तख्तप्रकाश

 (5) भावभुषण

 (6) पिंगळ काव्य भाग -  1अने 2 

(7) सुबोधमाळा 

(8) ईश्वर आख्यान 

(9) पींगळ विरपुजा 

(10) सुजात चरित्र अने सतीमणी नोवेल 

(11) श्री सत्यनारायण कथा संस्कृत-गुजरातीमां तरजुमो ....

जेवा ग्रंथो तेमणे रचेला ,


तेओ श्री कृष्णकुमारसिंहजी - चारणविध्यालयना स्थापक पण छे . ते उपरांत पिंगलशिभाय "चारण हित वर्धक सभा" ना पायाना पत्थरों पैकी ना एक हता,


राजकवी श्री पिंगलशिभाय नरेला ने मळेला बिरुदो


"मध्ययुग ना छेल्ला संस्कारमूर्ति चारण", 

"देवतुल्य कविराज",

"चारण शिरोमणी",

"अखंड आराधक",

"साधुचरित कवी",

"शुभ संस्कारो नो मनवदेहे विचरतो स्तम्भ",

"ड़िंगळ नो उकेलनार",

"सर्जनशक्ति नो पुंज",

"भावनगर नी काव्य कलगी"

"महाराजा ना मुगट नो हीरो"


तथा


नरसिंह मेहता, दयाराम, धीरा, मीरां आने अखा ने समकक्ष कवी,


जेवा अनेक मानवाचक बिरुदो, शब्दों अने लेखो थी महाराजाओ, कविओ, लेखको, अने विवेचकोए बिरदव्या छे।


महाराजा श्री अे तेमणे आपेला ( शेढावदर ) गाममां  आजे पण राजकवि श्री पिंगळशीभाई पूजाय छे,


राजकवि पद उपरांत

पींगळशीभाई

जोगीदानभाई नरेला

अनीरुधभाई नरेला

तेमज चंद्रजीतभाय नरेला


आ सर्वे भावनगर राज्यना अंगत सलाहकार पदे पण रहेला ,


:- नरेला कुटुंबनि पांच पेढी  राजकवि पदे रहेला.

तेमा

मुळभाई नरेला

पाताभाई नरेला

पींगळशीभाई नरेला

हरदानभाई नरेला

बळदेवभाई नरेला..


राजकवि पदे रहेला

 

आ माहिती संकलन माँ " श्री धर्मदिपभाई नरेला" मददरूप बन्या एे बदल एेमनो खूब खूब आभार

टाईपमां भुल अथवातो जाणकारी अने जीवन परीचय   विशे काईपण  सुचन करवा हेतुसर नीचेना नंबर पर मेसेज करवा विनंती छे


           

 *वंदे सोनल मातरम्*

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