ચારણત્વ

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શનિવાર, 17 સપ્ટેમ્બર, 2016

मां सोनल चालीशा : रचना :- दिलजीतभाई गढवी

*मां सोनल चालीशा*

        *दूहो*
प्रभाते प्रथम वांचिये सोनल चालीशा,
आई पूरे आशा मढडा वाळी
मावडी,
          *छंद*
जै सोनलमां  जै  माताजी
आद्यशकित  के  अंबाजी
जन्म्या चारण कूळ जोराळी
जै जै जै मां मढडा वाळी..1

कफरा आ कळी काळे आव्या
स्नेह छौरुडा पर लाव्या
हानी  हरवा ने  हेताळी
जै जै जै मां मढडा वाळी...2

अज्ञान ने मां अळगा कीधा
अक्षरना रुडा ज्ञान तें दिधा
भणाव्या छोरुने  भूजाळी
जै जै जै मां मढडा वाळी...3

गंगा  जेवू  पवित्र   झरणूं
सूख आपेछे  मांनू  शरणूं
दळणू करीने दूःख दळनारी
जै जै जै मां मढडा वाळी...4

व्रण माथे हती रात अंधारी
एमा ज्ञाती जो  अटवाणी
प्रगटी ई  वखते  परचाळी
जै जै जै मां मढडा वाळी...5

कू-रिवाजो  कोरे  करवा
आव्य आई आपदा हरवा
धींगी धरामा धाम धजाळी
जै जै जै मां मढडा वाळी...6

चारण धारण शब्द सूणायो
वरण आखा  ए    वधाव्यो
हस्ते मूखे  दई  हरीयाळी
जै जै जै मां मढडा वाळी...7

पापीना ज्यां पाप हटे छे
माना शरणे रोग मटे छे
धन्वंतरी मां देवी दयाळी
जै जै जै मां मढडा वाळी...8

शरणे तारे सूखनो  दरियो
अखूट खजानो आंगण भरियो
खूटे नहि खर्चे खपराळी
जै जै जै मां मढडा वाळी...9

सत्त चूकेला चिले चाल्या
बावडूं झाली पाछा वाळ्या
डारो दिलथी दईने दयाळी
जै जै जै मां मढडा वाळी..10

संकट वखते राह  बतावे
आधी व्याधी ने अळसावे
उपाधी अळगी करनारी
जै जै जै मां मढडा वाळी..11

चंडी साची सूखनी राशी
आई अमाणी छो अविनाशी
मढडा निवासी मांने भाळी
जै जै जै मां मढडा वाळी..12

जळहळ ज्योती मढडे जागी
लग्नी मांना शरणे लागी
हमीर दूलारी मां हेताळी
जै जै जै मां मढडा वाळी..13

मूर्ति मां नी मंगल कारी  अ'मंगळ अळगा करनारी
ओपे माथे कामळी काळी
जै जै जै मां मढडा वाळी..14

अन्नपूर्णा छे आई अमारी
विघन नाख्या बधा विडारी
तारवा आवी मां तत्काळी
जै जै जै मां मढडा वाळी..15

भव सागरमां भूला पडेला
चित जेना चकडोळ चडेला
चारण छोरु लिधा संभाळी
जै जै जै मां मढडा वाळी..16

चारण धारण एक थवानी
भेद मटाड्या बधा भवानी
तिमीर सघळा दिधा टाळी
जै जै जै मां मढडा वाळी..17

बावडूं थोभी बाई बचावो
मारग साचो मात बतावो
स्नेहथी लेजो मने संभाळी
जै जै जै मां मढडा वाळी..18

जगमां शकित जीत अपावे
जिभेथी  जगदिश  जपावे
वरुडी स्रुपा वडहथ वाळी
जै जै जै मां मढडा वाळी..19

स्नेह सरुपी समता तूछो
मात अमारी ममता तूछो
जीवन दिधू आई उजाळी
जै जै जै मां मढडा वाळी..20

आफत आवे जो अणधारी
वेगे देजो  मात  विदारी
वारु करजो वालप वाळी
जै जै जै मां मढडा वाळी..21

संकट वखते साद करुछू
धाबळियाळी ध्यान धरुछू
कांठे करजो आई कृपाळी
जै जै जै मां मढडा वाळी..22

जहांज जूनूने जळछे जाजू
लोबडीयाळी राखो लाजू
नेखमें लावो नाव नेजाळी
जै जै जै मां मढडा वाळी..23

काळी अंधारी कांईन सूजे
मेघली राते थरं थर धृजे
व्हाण तारी ल्यो विगतवाळी
जै जै जै मां मढडा वाळी..24

तोफानी दरियेथी  तारो
निजाश्रीतने आई उगारो
भै हरी ल्यो भेळियावाळी
जै जै जै मां मढडा वाळी..25

नजरे राखो नाव अमारु
बळवंत लावो हेते बारु
तारील्योने त्रिशूळवाळी
जै जै जै मां मढडा वाळी..26

साचे गळगळो साद थयोछे
अंतरथी आराध  थयोछे
बाळ बचावो मां बिरदाळी
जै जै जै मां मढडा वाळी..27

देश सोरठने  तमे  दिपाव्यो लाव अनोखो अमने अपाव्यो
आई राणलनी कूंख उजाळी
जै जै जै मां मढडा वाळी..28

मारु तूंबेल अने परजियो
अगरवसोने वळी सोरठियो
भेद भूसाणा बधा भूजाळी
जै जै जै मां मढडा वाळी..29

सघळी शांती मातु शरणमा
आई अमारी वडी वरणमा
हमीर धीडी हरख वाळी
जै जै जै मां मढडा वाळी..30

शिष आकाशे पग पाताळे
भूवन त्रणै  नजरे   भाळे
आभ अटारिये आसनवाळी
जै जै जै मां मढडा वाळी..31

हरीहरना ज्यां साद पडे छे
जमनारा ज्यां भोळा जडे छे
ठहक थी मां पिरसे थाळी
जै जै जै मां मढडा वाळी.32

आई अंधाराने अळसावो
लाड छोरुने खूब लडावो
तूं दयाथी ज्ञाति तेजाळी
जै जै जै मां मढडा वाळी..33

अंतर थी जे याद करे छे
तेने सहाई तरत मळे छे
पूगे वारे  मां  पगपाळी
जै जै जै मां मढडा वाळी..34

वरसे तूं वरसाद सरुपे
मां  देखाणी दिपे  धूपे
थडां मंदिरे थानक वाळी
जै जै जै मां मढडा वाळी..35

शकित सांभळ साद अमोरो
सारो नठारो छू बाळ तारो
गूना जोशोना मां गूणवाळी
जै जै जै मां मढडा वाळी..36

व्याधीने विखवाद हरील्यो
दर्द देहना दूर करी  दयो
दवा मटाडो  हवे  दयाळी
जै जै जै मां मढडा वाळी..37

नाभी कमळनो नाद थयो छे
वालपनो वरसाल अंयो छे
विजा रुपे  मां  वरताणी
जै जै जै मां मढडा वाळी..38

विरडो वालप वाळो मां छे
मां दया थी खम्मा खम्माछे
क्षमा धरो ने मां सतवाळी
जै जै जै मां मढडा वाळी..39

चरणे मांना शिष नमावू
स्नेहे चालीशा संभळावू
बाटी दिलजीत बाळ दयाळी
जै जै जै मां मढडा वाळी..40
           *दूहो*
चालीशा नो स्नेहथी जे करशे कायम पाठ,
आई सोनल आपशे ठाकर वाळो ठाठ;       1

भजन भाळी भावनू आई आवे अविलंब,
मढडा वाळी मावडी जै सोनल जगदंब,   2

सवार सांज संभारशे जे अंतर
धरी उमंग,
आई सोनल आपशे राज समो  नित रंग,      3

*मां सोनल चालीशा*
एटले मां सोनल नू महीमा
गान आई सोनल मां चारण समाज माटे मोटां मां मोटूं
श्रध्धा नू केन्द्र एटले मां नू मढडा अने आई सोनल आजे जे आपणा समाज नी भव्यता
देखाय छे ई मात्र ने मात्र जो
कोई नो प्रताप हाय तो ई आपणी आई सोनल नो
प्रताप कहेवामा जराय अतिश्योकित नही कहेवाय
माटे माना गूणगान गावा माटे
चालीशा लखाणी छे नही के
विद्वता बताववा माटे हूं ठामूको विद्वान नथी कोई पण जात नू जाजू भणतर नथी
छता मां उपर नी श्रध्धा आखा समाज ने सविशेष होय छे तेथी भूल होय तो भूल साथे स्वीकारशो एवी आशा साथे *दिलजीत बाटी*
ना *जै सोनल*
*मो.9925263039*

स्व.श्री बापलभाई गढवी चोकनुं नामाभिधान

भगतबापु रचित सुवाक्यो

जय माताजी

आजना सुवाक्यो

*31. दुनियानी सौ अजायबीओमां मोटी अजायबी अे छे के , मरण चोक्कस छे, छतां जीवननिर्वाहनी प्रवृत्ति उपरांत पण मानवी केटलीक अंधाधूंधी करी बेसे छे.*

*32. रोग , वृद्दत्व , अने मरण ईच्छा विना आवे छे.*

*33. शास्त्रो जे आज्ञा करी गयां छे . तेना पालन करतां जेनी ना कही गयां छे.ते करवा तरफ मनुष्यनी वधारे प्रवृत्ति छे.*

*34. महापुरुषना आदेश पर बुद्धिनां चोगठां बनावीने मनुष्ये पोताने मनमानतो व्यवहार कर्यो छे.*

*35. गूमडाने रुझ तो अंदरथी आवे छे. बहारनो उपचार तेने वधवा देतो नथी.*

*36. नाना झाडने थोडो वखत वाड करीने रक्षण करवुं जोईअे मोटुं थया पछी अेने ढोर वगेरे उखेडी शक्तां नथी.*

*37. सुखी मानवीओना स्मशाननुं नाम शहेर छे.*

*38.बुद्धि अेक नवी वस्तुनी शोध करीने सो उपाधिओने जन्म आपे छे.*

*39. ईश्वरने न मानवा करतां मानवाथी फायदो छे , न मानवी वीतावेला अवतारने अंते पस्तावानो पार रहेतो नथी.*

*40. उत्तम क्षुधा निर्विघन निंदा, अंग महेनत अने ग्रामनिवास अे महापुण्यनां फळ छे.*

*रचियता :- भगतबापु , कागवाणी भाग - 5*

શુક્રવાર, 16 સપ્ટેમ્બર, 2016

धन्य धरां सौराष्ट्र : रचना :- दिलजीतभाई गढवी

॥ *धन्य धरां सौराष्ट्र*॥

         *दूहो*
धींगी धरा सौराष्ट्रनी धींगा धर्म ना धाम,
धींगा माडूं धीरज घणी नरवा कर्मी नाम;

         *छंद*
द्वादर्श ज्योती लींग मां जेनी
प्रथम पूजा थाय छे,
धरणी अमारी पवितर पूराणे  पंकाय छे,
द्वारकानो धणी अमाणो सबळ
चोकी दार छे
धन्य धन्य धरा सौराष्ट्र नी वंदन हजारु वार छे...1

सिध्ध चोरासी अने ज्या बूढी ना छे बेहणां,
नवनाथ ना रुडा नेखमो ने तेजपूंजो ते तणां,
जूग जूनो तोय नवो गरवो आ गीरनार छे,
धन्य धन्य धरा सौराष्ट्र नी वंदन हजारु वार छे...2

सरभंग वाळा समय थी ज्यां
परब बांधी प्रेमनी,
हेते धरे जो हाथ माथे करे काया हेमनी,
करे सेवा पतियानी देवीदास नो दरबार छे,
धन्य धन्य धरा सौराष्ट्र नी
वंदन हजारु वार छे...3

संसार वाटे चालवा नू  प्रथम पगलू ज्यां भर्यू,
सेवा निहाळी संतनी सत्त धाम मां चितडूं ठर्यू,
पछी'परबे रोकाणा मात अमर
आई नो अवतार छे,
धन्य धन्य धरा सौराष्ट्र नी
वंदन हजारु वार छे...4

साधू जमाडी जमवानू व्रत लीधू वाणिये,
अतिथी काजे कूवर कापी खांड्यू माथू खाणिये,
परिब्रह्म पोते हट्यो पाछो जे धीरजनो धरनार छे,
धनूय धन्य धरा सौराष्ट्र नी वंदन हजारु वार छे...5

जलियाण तारा झूपडे योगी बनीने आवियो,
विरबाई मागी दानमा एणे तपस्वी ने तागियो,
भूदर भाग्यो भगतथी जे धीरज नो धरनार छे,
धन्य धन्य धरा सौराष्ट्र नी वंदन हजारु वार छे...6

डालां मथां ज्या डणंकता ई
गीरमां गीगो वसे,
दर्शन करता दूःख सघळा खलक कोरे थी खसे,
आधी उपाधी व्याधी सघळी
तुरत त्यां टळनार छे,
धन्य धन्य धरा सौराष्ट्र नी वंदन हजारु वार छे..7

भोळानी करवा भेर जेदी हमीर हेल्यो हरखथी,
दिधून डगलू तहूं पाछू तलवार वाळा तरकथी,
सोमनाथ सारु रियो रण मां
दोखी नो दळनार छे,
धन्य धन्य धरा सौराष्ट्र नी वंदन हजारु वार छे..8

दूकाळ पडियो देशमा वरतवा विर आविया,
जवन नजरे पडी जाहल सूमरे सताविया,
तेदि'हमीरने तू हाल्यो हणवा सोरठनो सरदार छे,
धन्य धन्य धरा सौराष्ट्र नी
वंदन हजारु वार छे,..9

विजाने शेणल आई नी वातो
हजी वंचाय छे,
हाथ मागी हजू नाव्यो अंतर
मा अकळाय छे,
हाड हैमाळे गळी आवी मां तणी मनवार छे,
धन्य धन्य धरा सौराष्ट्र नी वंदन हजारु वार छे...10

गाम नमळे गीरमा ज्यां नाना-नाना नेहडा,
परोणा काजे प्राण आपे एवा
अमीर हैया एवडा,
धन धान वाळा पडे ढीला एवा अंतरना उदार छे,
धन्य धन्य धरा सौराष्ट्र नी वंदन हजारु वार छे..11

टिलात तळाजा तणो सत्त साई नेहे आवियो,
माग्य मूखथी कापडूं जगदंब
जिवीत राखियो,
बापे बेटानू शिष काप्यू एवो विरनो वहेवार छे,
धन्य धन्य धरा सौराष्ट्र नी वंदन हजारु वार छे..12

बाकर माटे बाई तूं सरधार मां
भुई सिंहणी,
कमकमी काया कवेण सूणी
बणी क्रोधे बमणी,
मारी पछाडी कर्या कटका जोगणी जमनार छे,
धन्य धन्य धरा सौराष्ट्र नी वंदन हजारु वार छे...13

एभल जायो आटक्यो कमळ विण भारथ कियो,
जश लियण जैताणा धणी तूं शाहनी सामे थियो,
केकाण कविया ने दिधो एवो देहविण दातार छे,
धन्य धन्य धरा सौराष्रट्र नी वंदन हजारु वार छे..14

आहीर केरा आशरे ज्या रा' आवीने रियो,
माथू कापी आंखू कचरीस थीर मन नो थडकियो,
टेक खातर तनूज दिधो ई
यूगल नो उपकार छे,
धन्य धन्य धरा सौराष्ट्र नी वंदन हजारु वार छे..15

बारवटने पाळनारो जवा मर्द जोगो थयो,
वखतसिंहना वखत वखते सिंहना छूपो रियो,
डणक्यो सिहोरा डूंगरे तूं शूर नो शणगार छे,
धन्य धन्य धरा सोराष्ट्र नी वंदन हजारु वार छे,..16

वाळा तणी वावडीमां रण जीतण रामो थीयो,
डोहा पटेले कर्यो डारो त्यां सादूळो सामो थीयो,
मारी पछाडी उभो माथे बंदूक ना ज्यां बार छे,
धन्य धन्य धरा सौरेष्ट्र नी वंदन हजारु वार छे,...17

सवळा पडे जो चीरिया तो प्राण राखे प्रेमथी,
अने अवळा पडेतो एज घडिये
जीव त्यागू देहथी,
निमी तिथी ए निम लिधू हादल नो हूंकार छे,
धन्य धन्य धरा सौराष्ट्र नी वंदन हजारु वार छे...18

क्षत्रीय आगळ चारणे सावज माग्यो जिवतो,
वेण देतो वदू तूने पछी ज पाणी पीवतो,
केहर अर्पयो कान झाली पवित्र परमार छे,
धन्य धन्य धरा सौराष्ट्र नी वंदन हजारु वार छे,..19

कनरे जाता कैक यादी आंख सामे आवती,
महिया मर्दनी खांभियो बधी धीरजने धृजावती,
मान साटूं मोत वालू कोण बिजू करनार छे,
धन्य धन्य धरा सौराष्ट्र नी वंदन हजारु वार छे,..20

मिटूं मळीज्यां मांगडाथी मन वचनथी वरी,
पद्मावती नी प्रीत केवी भूतथी फेरा फरी,
वडले रोकाणी विरल नारी प्रेम पारावार छे,ह
धन्य धन्य धरा सौराष्ट्र नी वंदन हजारु वार छे...21

आघी खहिशमां एक डगलू एम कईने ई गयो,
गळाथ दई गढवी मने जंजीर मां जकडी गयो,
सोगंद तोडे स्वामीना ई धण्य ने धिक्कार छे,
धन्य धन्य धरा सौराष्ट्र नी वंदन हजारू वार छे...22

खांभीपरे आ खेमरानी लोहीं लोडण जारती,
वळजे तूं पाछी वेगथी ई शब्द ने संभारती,
करज्यो न कदिये कोई प्रिती
प्रेमीनो पोकार,
धन्य धन्य धरा सौराष्ट्र नी वंदन हजारु वार छे...23

टहूके मधूरा मोरला ने ओढो कां अकळाय छे
हारेल हैये तोय होथल धीरज देवा धाय छे,
वर्षामां वाला सांभरे ई विश्व नो वहेवार छे,
धन्य धन्य धरा सौराष्ट्र नी वंदन हजारु वार छे...24

आणलदेथी आंख मळता दिल दिधू देवरे,
ढोलरानी  धीरज  आखा परगणा मां परवरे,
एकसाटे बे आपे तोय ढाल नहीं वळनार छे,
धन्य धन्य धरा सौराष्ट्र नी वंदन हजारु वार छे..25

मरशियानी मोज सारु कपट केवू आदर्यू,
साद सूणी चारणीनो थीर हैयू थडकियू,
न्याज रेजे नागाजण हवे तूं मारे मन मरनार छे,
धन्य धन्य धरा सौराष्ट्र नी वंदन हजारु वार छे...26

खांभी निहाळी खंतथी में नेक भड नजराज नी,
यादी थई मूने एज वखते शूर ना सरताज नी,
भल भूप भिमोराधणी ने खमां  खमकार छे
धन्य धन्य धरा सौराष्ट्र नी वंदन हजारु वार छे..27

माणेक जोधो अने मूळू अंग्रेज सामा आटक्या,
ओखा माटे अहराळ थईने
तेग लईने त्राटक्या,
कीधू धींगाणू कृष्ण सारु जे श्यामना सरदार छे,
धन्य धन्य धरा सौराष्ट्र नी वंदन हजारु वार छे...28

ओखा धरामा आई अमणी
बेठी मां बळवान छे,
सरकार साची चारणो नी भै मिटावण भाण छे,
मूगलाने मांडी मारवा जाणे आगनो अवतार छे,
धन्य धन्य धरा सौराष्ट्र नी वंदन हजारू वार छे...29

चंडी चामंडा नू बेहणू ई परगणू पंचाळ छे,
त्रिपूरारी तरणेतरमा भव रोग
नो हरनार छे,
सूरज देवळ शोभतू जाणे श्रृष्टी नो शणगार छे,
धन्य धन्य धरा सौराष्ट्र नी वंदन हजारु वार छे...30

चेतक सरीखा घोडला पंचाळ
मा पाक्या हता,
राजा न राणा गूण गाता जीभ थी थाक्या हता,
हजी हावळ्यू संभळाय जाणे
राणो माथे अहवार छे,
धन्य धन्य धरा सौराष्ट्र नी वंदन हजारु वार छे...31

दातारी एना दिलनी हजू विवेकथी वखणाय छे,
महिपती मोटा पडे भोंठा अमिरो अकळाय छे,
बडभागी बाबी कमाल तारी जीगर ने जूहार छे,
धन्य धन्य धरा सौराष्ट्र नी वंदन हजारु वार छे...32

एक साथे बधा पाधर राष्ट्रने अर्पण कर्या,
अधीकार जातो करी जग मां
अमर किरत ने वर्या,
प्रजा माटे परोपकारी कृष्ण कृष्ण कूमार छे,
धन्य धन्य धरा सौराष्ट्र नी वंदन हजारु वार छे...33

नर नरा कूळमा आवियो कहू केवो ई कविराज छे,
कृष्णभकती मां लिन कायम
सत्तनो शिरताज छे,
कवि पिंगळशीनी कविता महा
मंत्रोच्चार छे,
धन्य धन्य धरा सौराष्ट्र नी वंदन हजारु वार छे..34

शिर मौर चारण वरण नी तूं खरेखर ओळखाण छे,
दाढी वाळा काग दूलां खमीरी नी खाण छे,
काव्य केणी कंठनो भायल सतण भरथारछे,
धन्य धन्य धरा सौराष्ट्र नी वंदन हजारु वार छे..35

संत दाता सती भकतो शूर विर निपजावती,
कैक कवियोनी कलमथी नित गीत रुडा गवरावती,
*दिलजीत* जन्म भोम उपर
ओळ घोळ अवतार छे,
धन्य धन्य धरा सौराष्ट्र नी वंदन हजारु वार छे.36

निजानंद माटे लखायेल आ
कविता खरेखर कोईना वखाण करवा खातर नथी लखी संत शूरविर दातार
पवित्र देवभूमी तेमज संस्कार सभर ईतिहास नी अमर वातो आप सूधी पंहोचाडवानो विनम्र प्रयास छे जे आपने गमशे ई मने पण गमशे कदाच क्षति होय तो मोटू रदय राखी भूलसाथे स्वीकारवा कृपा सारु तमारु बाकी बधू मारु
*जै सौराष्ट्र*
*दिलजीत* *बाटी* ना
रदयथी जै माताजी *ढसाजं.**मो.9925263039*

सुर्य वंदना रचना :- जोगीदान गढवी(चडीया)

.               *सुर्य वंदन सपाखरु*
काळा वादळा हठाळा माळा,गाळा गरजाळा मळी, त्रांणीया बांधीया गोढ तीमीराळा तांण.
त्यांतो
आवीयो सादूळो सूर त्राटक्के अजा रे टोळ, ओळे घोळे कोळे बुक्का अंधकारा आंण.

भांगीया खेखट्ट जट्ट पट्ट अंधकारा जोगा, भळक्के डणंके भळेळाट उग्यो भांण.
जळक्के ढळक्के तेज तिमीराळा त्रागा त्रागा, वागा हथ लागा सातो कुदीया केकांण

चडीया न चुके पथ पडीया कीताक्क पाणां,
नांणा नत टांणा पूरो निकळे नवांण
जांण जोगीदांण भांण खरो म्रदायु री खांण
वांण वरदांण करां धरंतो क्रीपांण

भगवान सुर्य नारायण ने मारां नित्य वंदन छे

🌅🌞☀🙏🏻☀🌞🌅

माणसने कहेवुं पडे छे के तुं माणस था. प्रस्तुति कवि चकमक ( जीलुभाई सिल्गा )

माणसने कहेवुं पडे छे के तुं माणस था...!

गामडा गाममां बळदने कोहे जोडे ऐटले पयाना मापनी खबर पडे. पंदर डगला हाल्यो छुं ऐटले कोह आवी गयो हशे. सोळमुं डगलुं बळद नो हाले. माथु आम नमावे त्यां कोह ठववाई जाय. बळदने खबर पडे छे के आगळ नो जवाय. अने आ माणह भटकाय नहीं त्यां सुघी पाछो नो वळे.
आमां बळद सारो के माणस सारो ? बळदने तमे खीले बांघशो तो तोडावशे नही बोलो..! ऐने खबर छे के मारो मालिक बांघीने गयो छे. मने पाणी पीवडावे छे, खड खवरावे छे. मारे तोडावाय नहीं. माणसने आपणे माणेकचोकमां उभो राखीऐ तो ते बसस्टेन्ड मोर पूगे. आपणने पाछो कहे तमे त्यां नो आव्या ते हुं आई आव्यो. हा हवे मर, तुं हवे अमारी हारे मर.
आमा बळद सारो के माणस सारो ? बळद जुगार रमे ? तो के ना. मरद रमे. गायुं फिलम जोवा जाय ? तो के ना. बायु जाय..!

स्व हरसुर गढवीनुं साहित्य.

कवि भरत उमिॅल कहे छे,

नथी हसरत मने दिलमां कोई महान बनवानी,
चाही सुख-संपति केवळ महाघनवान बनवानी.
बनी सहभागी हुं सौनो खुशी-गम थोडां वहेंचीने,
उरे अभिलाष छे ऐक ज फकत ईन्सान बनवानी.

जय माताजी.

प्रस्तुति कवि चकमक.

भगतबापु रचित आजना सुवाक्यो

जय माताजी

आजना सुवाक्यो.

*20. थोडे पण हलके पंथे पडेलो मानवी नाश सुधी जाय छे.*

*21. तिरस्कारवृत्ति धिक्कारनी माता छे.*

*22. अभिमान पडतीनो पिता छे.*

*23. कायर दिनसमां दश वखत मरण पामे छे.*

*24. शूरवीर मृत्युथी अजय छे.*

*25. संशयशीलने सुधारवा ब्रह्मा पण अशक्त छे.*

*26. खराब वातावरण भक्तिमां बाधारुप छे.*

*27. सुखमां मानवी ईश्वरने अेक रमकडा तरीके संभारे छे.*

*28. दु:ख , मंदवाड अनेनिर्धनता घणी वखत मानवीने प्रभूनो भक्त बनावे छे.*

*29. विषयमां लपटेल आत्मा सहेलायथी सत्यने मार्गे चडी शक्तो नथी.*

*30. विमय विनानी विद्या , दया विनानुं दान , भावना विनानी भक्ति अने स्नेह विनानो गृहस्थाश्रम अफळ अने दु:खदायी नीवडे छे.*

रचियता :- भगतबापु , कागवाणी भाग :- 5

ગુરુવાર, 15 સપ્ટેમ્બર, 2016

मां मोगल माळ : रचना :- दिलजीतभाई गढवी

*मां मोगल माळ *
          *दूहो*
माळा लखवा मात नी
सरसत  आपो  साथ,
वैखरी विदारण वाग्दा
मां नमू  शारदा   मात,
       *दूहो*
जगदंबा जग तारणी
समरथ  सो  सम्राट,
तारा छी ए ने  तारजे
मां जै जै मोगल मात
     *छंद भूजंगी*

जै मोगल मां जै जगदंबा
आधशकित हे मां अंबा
ओखा जनम्या छो अवतारी
जै मोगल मां मच्छराळी *1*

आदी अनादी आई अखंडी
चारण तारण सत व्रत चंडी
थाकेला ने थोभ देनारी
जै मोगल मां मच्छराळी *2*

धाह सूणीने आवे ध्रोडी
मां  पडे ना कदिये मोडी
छोरुडा ने लिये संभाळी
जै मोगल मां मच्छराळी *3*

काम उकेले सघळा करणी
हानी ने वळी व्याधी हरणी
अधम उधारण छो उपकारी
जै मोगल मां मच्छराळी *4*

घांघणिया घीरे घणनामी
संकट वखते आवे सामी
देवसूर धीडी खूब दयाळी
जै मोगल मां मच्छराळी *5*

छोरु चारण नां संताप्या
दंड एने मां खूबज आप्या
विघन विडारण वड हथवाळी
जै मोगल मां मच्छराळी *6*

खडग खप्पर हाथे लईने
दैय्तो सामे दोटज दई ने
खूब खिजाणी मां खेधाळी
जै मोगल मां मच्छराळी *7*

राक्षस सामे रणमा कूदी
जगदंबा वरताणी जूदी
सिंहण रुपे तूं सत वाळी
जै मोगल मा मच्छराळी *8*

काळि सर्पो हाथ लिधा छे
दानव कूळने दंड दिधा छे
रणमा रमती तूं रगताळी
जै मोगल मां मच्छराळी *9*

पिड दियेनां कोय पनोती
आफत आवे ना अणजोती
जेनी भेरे मात जोराळी
जै मोगल मां मच्छराळी *10*

कावा दावा कोई करावे
फूदमां खोटा कोई फसावे
तो दूश्मनने तूं दमनारी
जै मोगल मां मच्छराळी *11*

कष्टो सहू ना हेते कापे
मन माग्यू मोगल मां आपे
दुःख दाळीदर दळवा वाळी
जै मोगल मां मच्छराळी *12*

विध विध रुपे मां वरताणी
धूपे  दिपे  तूं  दरसाणी
चारण शकित छो सतवाळी
जै मोगल मा मच्छराळी *13*

आण आपी सूरज थंभावे
आई अनादी आवड आवे
भरे न डगलूं भाण भूजाळी
जै मोगल मा मच्छराळी *14*

नडा बेटमां निवास मानो
मार्ग कांठे नेह मजानो
वरुडी रुपे त्या वसनारी
जै मोगल मां मच्छराळी *15*

सेना नौघण लईने आवे
जाहल वारे सिंधमां जावे
कटक जमाड्यू मां कृपाळी
जै मोगल मां मच्छराळी *16*

समदरमा मां मारग कीधो   
सायर ने पण सोषी लिधो
हांक दई हमीर हणनारी
जै मोगल मां मच्छराळी *17*

पीठड मां नो परगट परचो
सिंध जिती ने वेगे वळशो
आहीर बाळा ने उगारी
जै मोगल मां मच्छराळी *18*

काळी चकली आई बनी ने
भाले बेठी जई नवघण ने
विरो आव्यो जाहल वाळी
जै मोगल मां मच्छराळी *19*

बाकूला डूंगरे बाळ बोलावे
अंतर नादे आयल आवे
खाडूं खंते लाव्या वाळी
जै मोगल मा मच्छराळी *20*

भान भूलिने भू पती आव्यो
पाट जूनाणां नो पलटाव्यो
मां अमाणी मोणिया वाळी
जै मोगल मां मच्छराळी *21*

नागल नामे नवखंड धामे
नाम जपे ते नव निधपामे
हाड हिमाळे मां गळनारी
जै मोगल मां मच्छराळी *22*

पापीने पण पवित्र किधा
अछूतने अपनावी लिधा
खांभी मां ना खोळे भाळी
जै मोगल मां मच्छराळी *23*

मेंद मावलने परचो दिधो
नव नाळचे होंकारो दिधो
राजी राखो मां रव वाळी
जै मोगल मां मच्छराळी *24*

विद्वता ना वादे  वढवा
भाट कंकाळी आव्यो लडवा
राखी चारण लाज रुपाळी
जै मोगल मां मच्छराळी *25*

रवेची मां रवनी राजा
सौने राखो साजा ताजा
नवखंड मा नजरु करनारी
जै मोगल मां मच्छराळी *26*

चोराड कूळमां चापल आवी
आई अनोखी शकित लावी
हांक्यो सावज गाडे हठाळी
जै मोगल मां मच्छराळी *27*

धींगा धोरीनू मारण करीने
सिंह सूतो छे पेट भरीने
कान झाली कडे करनारी
जै मोगल मां मच्छराळी *28*

साद करंता राजल आवे
लाला काजे दिल्ली डोलावे
पिथल रक्षो परम कृपाळी
जै मोगल मां मच्छराळी *29*

चराडवा थी सिधी जईने
आग्रा दिल्ली आंटो लईने
राजपूती नी लाजू वधारी
जै मोगल मां मच्छराळी *30*

सिंहण थईने सत्त रक्षुते
अकबर ने जीवन बक्षुते
एम आवजे भेरे अमारी
जै मोगल मां मच्छराळी *31*

चराडवा नी समरथ शकित
भावे आपो मानी भकती
नाम भूलू ना कदी नेजाळी
जै मोगल मां मच्छराऴी *32*

क्षत्रीय तारु सतना चूकीश
पचास क्रोडे आवी पूगीश
वेणे पळी मां परचाळी
जै मोगल मां मच्छराळी *33*

कर्नल नाव किनारे के जे
तारा छीए ने तारी लेजे
डोकरी जबरी दाढीवाळी
जै मोगल मां मच्छराळी *34*

बिकानेर बिकाने आपे
जोधपूर उदेपूर स्थापे
वाना वधारण विठू वाळी
जै मोगल मां मच्छराळी *35*

राजस्थाने राजे माडी
दर्शन देजो दास ने दाडी
दूनिया भजे देशणोक वाळी
जै मोगल मां मच्छराळी *36*

बापल देथा नी बडभागी
लगनी माना चरणे लागी
बूट बल्लळ बहूचर बिरदाळी
जै मोगल मां मच्छराळी *37*

साते शकित तात मामडनी
आण लोपेनही भाण आवडनी
बिज होल सांसई सतधारी
जै मोगल मां मच्छराळी *38*

तोगड जोगड त्रिशळ धरणी
भिड टाळीने भव भय हरणी
कारज रुडा मां करनारी
जै मोगल मां मच्छराळी *39*

वराणा धामे मां विराजे
गळृधरे गूण कायम गाजे
माटेल तातणिया मरमाळी
जै मोगल मां मच्छराळी *40*

सराकडिया साच वधारण
महारोग ने मात मिटावण
ब्रह्म चारणी बव गूण वाळी
जै मोगल मां मच्छराळी *41*

महवाडी माटे बाबी आव्यो
स्नेहथी माए बव समजाव्यो
खिजी खान पर मां खेधाळी
जै मोगल मां मच्छराळी *42*

अरणा पर अहवार थईने
गई जूनाणे गांडी थई ने
जीभ खेंची बणी विकराळी
जै मोगल मां मच्छराळी *43*

पाघ उतारी पगमां पडियो
नवाब मांने निती थी नमियो
सोम्य सरुपा मां ने भाळी
जै मोगल मां मच्छराळी *44*

माफी आपी मां वळी तूं
गूमान एनू गई गळी तूं
एम गरव अमारा देजे गाळी
जै मोगल मां मच्छराळी *45*

बाबेणा मां नागल नेशे
बेनल आव्या बाळा वेशे
छात्रव धीडी चाटका वाळी
जै मोगल मा मच्छराळी *46*

गोळी मा रगत देखायू
वाणू त्रागा वाळू वायू
तळाजा परे करी तैयारी
जै मोगल मां मच्छराळी *47*

सूती ती नो केम जगाडी
लाय तळाजे दव लगाडी
वळ पाछी उडूं वेग वधारी
जै मोगल मां मच्छराळी *48*

राज वाजानू रोळी नाख्यू
वाजा विण तळाजू भाख्यू
शिला चांचे लई उडनारी
जै मोगल मा मच्छराळी *49*

डणक डाढाळी आभे देती
आभ आखाने आवरी लेती
कागल रुपे कोपी क्रोधाळी
जै मोगल मां मच्छराळी *50*

धारे धींगू धाम तमारु
आई सांभळ झट अमारु
ठाकर साची मां ठेशवाळी
जै मोगल मां मच्छराळी *51*

आई कामई नाम धरी तूं
खजूरिया ना नेहे खरी तूं
बाटी कूळमा मां बिरदाळी
जै मोगल मां मच्छराळी *52*

नवा नगर नो नृपती आव्यो
नबळो विचार मनमा लाव्यो
भाभी केता भठी भूजाऴी
जै मोगल मां मच्छराळी *53*

कामई काळो नाग देखाणी
अंगे अंगमा आग भळाणी
रगत निंगळती भूपे भाळी
जै मोगल मां मच्छराळी *54*

भै भाळी ने राजवी भाग्यो
पाघ उतारी पाये लाग्यो
माफ करीद्यो मां मरमाळी
जै मोगल मां मच्छराळी *55*

थरथर काया कंपवा लागी
गूण अंबेना गावा लागी
खोलिश नही दखणादी बारी
जै मोगल मां मच्छराळी *56*

बार वर्षे  बारी  उघाडी
दरिया माथी दिधो दजाडी
बाई अगनमा दिधो बाऴी
जै मोगल मां मच्छराळी *57*

दंडवत माने दिलथी करिये
करजोडी विनंती करिये
एम पाप अमारा द्यो परजाऴी
जै मोगल मां मच्छराळी *58*

मां तनूजा म्हेडू लाखा नी
सरकार साची वरण आखानी
जन्म वाळोवड मां लेनारी
जै  मोगल मां मच्छराळ 59

महिपत महिडो भान भूल्योछे
फोगट राहे खूब फुल्यो छे
धर्म चूक्यो छे धणी धजाळी
जै मोगल मां मच्छराळी *60*

मां हाली छे मंगल करवा
महिसागरना पाणी भरवा
शकित चारण शूभ करनारी
जै मोगल मां मच्छराळी *61*

वाळोवडना लोको विचारे
कोण अजाण्यू छे अत्यारे
हाथ जोडी नमे तूने नेजाळी
जै मोगल मां मच्छराळी *62*

अमि नितरती आंखो मानी
करो मां द्रष्टी हवे कृपानी
जन्म सूधारो अमू जोराळी
जै मोगल मां मच्छराळी *63*

अमृत झरती आई नी वाणी
समरथ शरणे सूखनी खाणी
भै मिटावी अभय देनारी
जै मोगल मां मच्छराळी *64*

गीलोल माथी कांकरी छूटी
त्या महिडानी आयूष्य तूटी
हाथ लंबावी रतन लेनारी
जै मोगल मां मच्छराळी *65*

भाग महिडा भागी जाजे
नहितर नो थावानी थाशे
छू पापी ना प्राण लेनारी
जै मोगल मां मच्छराळी *66*

निर भरीने आवी  नेशे
भाळी मां ने वहमा वेशे
कंपे थर थर काया सारी
जै मोगल मां मच्छराळी *67*

सात सो गाडे मां दरसाणी
जगमा बोली जै कार वाणी
खमां खमां कर मां  खमकारी
जै मोगल मां मच्छराळी 68

मीठी म्हेर अम पर लाव्या
रेढ कूळ अवतार लई आव्या
चारण व्रणने लिधो संभाळी
जै मोगल मां मच्छराळी 69

जानल जनम्या जगत जोराळी
पाणीमा पांचीके रमता भाळी
ई वेळा पाछी लावो वाळी
जै मोगल मां मच्छराळी 70

देरडी गामे वाव गळावी
नवला नीर नवाणे लावी
अढारे व्रणने एक करनारी
जै मोगल मां मच्छराळी. 71

सूबो आवे सेना सेना साथे
हाथ लंबावी मूक्यो माथे
गढ त्रांबाळू देखाड नारी
जै मोगल मां मच्छराळी.72

त्रांबा गढने ताजीम भरतो
सूबो भाग्यो डरतो डरतो
गायकवाड नो कर लेनारी
जै मोगल मां मच्छराळी.73

जाजी खम्मायू जानल माने
बाई सूखिया कर्या बधाने
देरडो डूंगर दिपे दयाळी
जै मोगल मां मच्छराळी.74

सोरठ देशे मढडा धामे मां
हमीर दूलारी सोनल नामे
अवतार लई ने अवन उजाळी
जै मोगल मां मच्छराळी.75

चारण कूळमा तूं रमनारी
भूवन त्रणेमा मां भमनारी
शिव शिवाने श्रधा तमारी
जै मोगल मां मच्छराळी.76

छोरुने सत्त पाठ भणाव्या
शूध चारणना गूण गणाव्या
अवगूणने अळगा करनारी
जै मोगल मां मच्छराळी.77

सोनल शकति साची चारणनी
ओखध आई मोह मारणनी
गर्व गाळण छो गूणवाळी
जै मोगल मां मच्छराळी.78

कफरा वखते कोण बचावे
आई विना कोण वारे आवे
स्नेहना साचा सणरण वाळी
जै मोगल मां मच्छराळी.79

चारण एक धारण मंत्र मोटोछे
ख्याल जगतनो बिजो खोटोछे
सव छोरुने क्षमा देनारी
जै मोगल मां मच्छराळी.80

कन्या विक्रय कोय करे नही
पाप ना पंथे  पग भरोना
मिट-दारु ने दूर करनारी
जै मोगल मां मच्छराळी.81

व्यभीचारी होय ना चारण
मदिरा पान करे नय चारण
दूराचारथी दूर लेनारी
जै मोगल मां मच्छराळी.82

त्रणे भूवन मा तू दरसाणी
वैराट रुपै मां वरताणी
आदेश आई उचारनारी
जै मोगल मां मच्छराळी.83

कू-रिवाज ने कोरे करती
अमणा अपराधो ने हरती
अभणने अक्षर ज्ञान देनारी
जै मोगल मां मच्छराळी.84

विद्या राहे बाळने वाळ्या
अज्ञान ना अंधारा टाळ्या
भणतर नू चणतर करनारी
जै मोगल मां मच्छराळी.85

अनेक रुपो आई तमारा
चोछठ सरुपे छो रमनारा
लाखू नवे तूं लोबडियाळी
जै मोगल मा मच्छराळी.86

अंग पीडा ओ अळगी करजे
व्याधी सघळी वेगे हरजे
धन्वंतरी थय ध्रोड धजाळी
जै मोगल मां मच्छराळी.87

कफरा वखते याद करीजो
मोगल मांनू ध्यान धरीजो
उकेले अटक्या छे उपकारी
जै मोगल मां मच्छराळी.88

गाम नगर के देश विदेशे
साद सूणी संभाळी लेशे
राखे बाळकनी रखवाळो
जै मोगल मां मच्छराळी.89

जळ थळमा के विमान वाटे
फरता होई  हाटे   घाटे
पेरो राखे नित परचाळी
जै मोगल मां मच्छराळी.90

दोखी दानव कोई दबावे
यादी अंतर मां नी आवे
अरिया हणती थै अहराळी
जै मोगल मां मच्छराळी.91

रुमझूम रथडे आई बिराजे
थानक माथी बेठी थाजे
बाळक काजे बिरद वाळी
जै मोगल मां मच्छराळी.92

सिंह सवारी मानी शोभे
अवनी माथे मोगल ओपे
भेरे रेजो विह भूजाळी
जै मोगल मां मच्छराळी.93

संकट वखते साद करु छू
दोडो जल्दी मां हूं डरु छे
भै हरो हवे भेळिया वाळी
जै मोगल मां मच्छराळी.94

ध्यान धरु त्या आवे ध्रोडी
मदय अरीना नाखे म्रोडी
संकट वखते सहाय देनारी
जै मोगल मां मच्छराळी.95

वहमा टाणे आवे वेली
बाई अमाणो थईने बेली
यूगे यूग अवतार लेनारी
जै मोगल मां मच्छराळी.96

आई आगेवान अमारो
पांहे तूं परधान अमारो
वांहे वाडी नी रखवाळी
जै मोगल मां मच्छराळी.97

प्रभाते उठी ने वहेला
समरण करिये सहूथी पेला
पतितने पावन करनारी
जै मोगल मां मच्छराळी.98

सेवकने मां सूखिया करणी
हित तजीने परहित करणी
भवदःख भांगी भिड हरनारी
जै मोगल मां मच्छराळी.99

मातूं वडेरी मोगल माता
राखो साजा ताजा राता
भावे भजू भगूडा वाळी
जै मोगल मां मच्छराळी.100

ओखा थडो भिमराणा वाळी
गीर गांडी ने गोरवियाळी
राणेसर मा रमता भाळी
जै मोगल मां मच्छराळी.101

निर्धन ने धनधान देनारी
पूत्र ने परीवार  देनारी
वंश वेली ने वधारनारी
जै मोगल मां मचाछराळी102

गरासने गौ धेनू आपे
अमृत वाळी मैयू आपे
कोठिये कायम कण देनारी
जै मोगल माः मच्छराळी103

दूध दंही ने दैवत देशे
कोठे जबरु कौवत देशे
नवनितने नवनिध देनारी
जै मोगल मां मच्छराळी104

दिकरा ने दूजाणू देशे
वलोणा वाळू वेणे देशे
सवार आपे मां सूखवाळी
जै मोगल माः मच्छराळी105

रात-दी मानू स्मरण करिये
तोज उपाधी थी उगरिये
आधार जबरो आई अमारी
जै मोगल मां मच्छराळी106

मोगल माळा जे कोय करशे
तमाम दूःखडा तेना टळशे
संतती आपे मां संस्कारी
जै मोगल मां मच्छराळी107

सूणे वांचे जे सांभळशे
पातक पंडना अळगा करशे
खम्मा करशे भां खमकारी
जै मोगल मां मच्छराळो108

दिलजीत बाटी जपे छे माळा
राखो बाळक ना रखवाळा
पाये नमू पोतावट वाळी
जै मोगल मां मच्छराळी109

          *दूहो*
माळा थकी जे मातनो करशे कायम पाठ,
एने मोगल आपशे ठाकर वाळो ठाठ;

*दिलजीत बाटी*
ना  जै मां मोगल
*मो..9925263039*

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