ચારણત્વ

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શનિવાર, 1 ઑક્ટોબર, 2016

पिंगल जनममहोत्सव 3

🌹" पिंगल जन्ममहोत्सव 3"🌹
( 12 ओक्टूबर 2016, 7.30 pm)

आमंत्रण को स्वीकार करे,

" पिंगल जन्म महोत्सव 3"
के इस पवित्र दिन पे हाज़िर होके लोकप्रिय चारणी एवम् डिंगल साहित्य की धरोहर आज भी मजबूत होने की पुष्टि करने का अनुरोध करते हे ।

इस प्रसंग के साथ श्री पिंगलशीभाई पातभाई नरेला के जन्म को 160  साल पुरे होंगे ।

इस प्रसंग का विषय खास कर वर्तमान युवा पीढ़ी को चारणी लोकसाहित्य से प्रेरित करना
और आनेवाली पीढ़ी को अपने पीढ़ीगत संस्कारो से अवगत करवाना हे ।

पिंगळ चरित्र ज्ञान ,  शक्ति आहवान  :-  श्री जोगीदान चड़िया ( प्रखर कवि अने वक्ता)

सरस्वती उपासक कलाकार, (लोक डायरो)

4  युवा प्रतिभा  "चारण गाथा" को प्रथम स्टेज मीलेगा.

श्री रघुवीर कुंचाला  अपने सुरो से समां बांधेंगे
श्री हरेशभाई गढ़वी साहित्य और शौर्य रस के उमदा वक्ता पिंगल गान।
श्री मेराण भाई गढ़वी राजकवि पिंगलशीबापू के इतिहास से वाकेफ करेंगे

श्री अनुभा जामांग , ( प्रखर सहीत्यकार)
श्री जितुदाद,  ( प्रखर सहीत्यकार)
श्री किरणबेन गढ़वी ( लोकगायक गुजरात विजेता),
श्री यशवंत लाम्बा ( प्रखर सहीत्यकार) ,
श्री रविराज भसलिया (शीघ्र कवी),
श्री  किशोर गढ़वी ( प्रखर सहीत्यकार)
श्री  विश्वा कुंचाला ( पार्श्व गायिका)

कवरेज करेंगे,

12 प्रिंट मीडिआ
23  टीवी चेनल्स
11 शोशियल मिडिया

अतिथि विशेष,

श्री वसंतदानजी गढ़वी (आई.ऐ.एस. माहिती खाता)
श्री योगेशभाई गढ़वी  ( अध्यक्ष. संगीत नाट्य अकादमी)
श्री शंकरदान के. लांगा (आई.ऐ.इस. डी.डी.ओ. महेसाणा)
श्री राजुभाई राणा.       ( संसद सभ्य)
श्री राजुभाई गढ़वी  ( डेप्युटी कलेक्टर, बोटाद)
श्री भारतीबेन शियाळ ( संसद सभ्य)
श्री दिलीपसिंह गोहिल ( माजी धारासभ्य)
श्री महेंद्र त्रिवेदी।         (प्रवासन मंत्री)
श्री कैलाशदान गढ़वी   (C.A. कांग्रेस सेल)
श्री रंजितसिंहजी गोहिल ( प्रमुख, भावनगर क्षत्रिय समाज)

ज्ञाति विशेषज्ञ :-

श्री रविदान मोड़           ( चेयरमैन, cgif)
श्री देवीदान गढ़वी        ( उप प्रमुख़, अखिलहिंद चारण समाज)
श्री पुष्पदान गढ़वी        (माज़ी संसद सभ्य)
श्री बी.जे.गढ़वी।          (निवृत I.P.S. )
श्री प्रवीणदान गढ़वी     ( प्रमुख , भावनगर चारण समाज)
श्री बलवंतदान  बाटी    ( प्रमुख, चारण प्रगति मंडल)
श्री दिलीप शिल्गा।       ( प्रमुख, अमदावाद चारण समाज)
श्री रामभाई जामंग।      ( प्रमुख, राजकोट चारण समाज)
श्री विजयदान गढ़वी    ( प्रमुख, कच्छ चारण समाज)
श्री भपतदान दाती।     ( प्रमुख, अमरेली चारण समाज)
श्री दादुभाई गढ़वी        ( प्रमुख, बरोड़ा, चारण समाज)
श्री लाभभाई जामंग       (प्रमुख, पंचमहाल चारण समाज)
श्री डॉ.अश्विन गढ़वी     ( प्रमुख, सुरेन्द्रनगर चारण समाज)

आप सर्व की उपस्थिति हमारे लिए आदर दायीं होगी।

हमारा निमंत्रण स्वीकार करे।

वेन्यू,
श्री पिंगळशीभाय पाताभाई नरेला मार्ग,
पानवाड़ी चोक,
भावनगर.

निमंत्रक,
राजकवि श्री पिंगलशिभाई पाताभाई नरेला परिवार।

सम्पर्क :-

सिद्धार्थ नरेला:- 9909913837              अमदावाद:- अतुलभाई गढ़वी:- 9925623300
राहुल लीला   :-  9925818193             
धर्मदीप नरेला :- 8734879108

नोंध:- सर्वे चारण अने चारण हितेछुओ ने आ आमंत्रण पोहचाड़वा विनंती.

आई श्री सोनलमां भाव : रचना :- दिलजीतभाई गढवी

*आई श्री सोनल मां*
          *भाव*
राग..माताजी हूं आटलू मागू..

सोनल आई शरणू तारु, माडी जालो बावडू मारु,...टेक

साद सूणी आवी चारणोना तूं मढडे सोनलमात,
कफरा आ कळीकाळमां तारी
सघळी चारण नात सोनल आई .....1

मती फरीने मोणीये आव्यो बव समजाव्यो बाई,
मान्यो नही मां मांडळीक ऐनू
राज उथाप्यू आई, सोनल आई.....2

सावज जोड्यो रथडे तेदी करणी झालीन कान,
कूळ चोराडा जन्मी मां तूं
परा शकित परमाण,सोनल आई......3

फरतो तो बव फाटमा सूबो
बेंकीयो बाकरखान,
सिंहणी थईने जीवणी ऐना पलमा लीधा प्राण, सोनल आई.......4

राणल गंगा आई राजल के समरथ चारणबाई,
गात्राड गेली आई गढेशी के तूं रववाळी रवराई, सोनल आई..5

मोगल चामूंड मावडी के तूं जबरी जानलआई,
अनेक रुपो आई तमारा कृपाळू कागबाई,सोनल आई .6

मढडा भाळी मूरती मानी ऐज अवतारी आई,
दिलजीत बाटी नी चरजू सूणी बेलपे रेजो बाई,सोनल आई..7

मढडा वाळी मां सोनल आई
ने स्नेह वंदना
दिलजीतबाटी ना जै सोनलमा मो..9925263039

नवरात्री स्पे.ऑडियो

नवरात्री निमिते ऑडियो मुकवानो नानकडो प्रयास करेल छे 

नवरात्री स्पे.ऑडियो 

  1.  श्री भीखुदान गढवी 
  2.  श्री देवराज गढवी (नानो डेरो)
  3. श्री कीर्तिदान गढवी 
ऑडियो डाउनलोड करवा माटे :- Click Here




શુક્રવાર, 30 સપ્ટેમ્બર, 2016

नेजाळी उजवे नेरता : रचना :- भगतबापु

आजथी नवरात्रीनो पारंभ थाय छे.ते नीमीते कविश्री कागबापुनी एेक रचना माणीये

*नेजाळी उजवे नोरता ...... सोनल उजवे नोरता.*

माडी तारे नोरता उजववाना नीम ......नेजाळी उजवे नोरता

माडी आज पाटे पेला गणेश पधारीया ,
माडी एेना घुघरा घमक्या ने दाळदर भाग्या रे दु:ख सौ दाग्या ..... ......नेजाळी उजवे नोरता

माडी आज बीजे नवलाख लोबडीयुं टोळे वळे ,
आहळ ओपे अन्नपुंर्णा ने अंबा रे जोराळी जगदंबा ......नेजाळी उजवे नोरता

माडी तमे त्रीजे सिध्ध चोरासी तेडाव्या ,
साधु तमे वस्ती चेतावो भगवे वेश आपोने उपदेश ......नेजाळी उजवे नोरता

माडी तमे चोथे चारण वरण नोतर्या ,
माडी एेना काढ्या आळस अभिमान विध्याना दीधा दान ... ......नेजाळी उजवे नोरता

माडी तमे पांचमे बळभद्रने बोलावीया ,
माडी तमे कीधा हळधर केरा मान धोरीना सनमान ...... ......नेजाळी उजवे नोरता

माडी तमे छ्ठे भुत भैरवने भेगा कर्या ,
माडी एणे तजी बीजा खोळियानी आश वोळावया कैलाश ...... ......नेजाळी उजवे नोरता

माडी अेवा सातमे रती देव आवीया ,
माडी एेणे स्वीकार्या नारकीनो निवास पापयोनो व कुठवास ....... ......नेजाळी उजवे नोरता

माडी एेवा आठमे दानव सघळा आवीया ,
माडी एेतो जाडाने जोराळा ठीमे ठाम मदिराना लीधा जोम ......... ......नेजाळी उजवे नोरता

माडी तमे नोमे रे खांडाने खडग नोतर्या ,
माडी तमे उगार्या बकरीना मुंगा बाळ उतार्या जुना आळ........ ......नेजाळी उजवे नोरता

माडी तमे दशमे हवन होम आदर्यो ,
माडी एेमां होम्या ईर्षाने अभिमान अग्नाने मद्धपान ......... ......नेजाळी उजवे नोरता

माडी तुं जो जनमी न होत जगतमां जोगणी ,
तो हुं "काग" कोना गुण गात मारा पातक कयांथी ..... ......नेजाळी उजवे नोरता

*रचयता :- कवि दुला भाया काग*

*```सर्वे मित्रोने नवरात्री पर्वनी हार्दिक शुभकामनाओ```*

*_टाईप :-charantv.blogspot.com_*

*आ रचना आजथी एक वर्ष पहेला टाईप करवामां आवी हती माटे  भूल होयतो क्षमा करजो*

आई मोगल वंदना पुस्तक

.                 जय माताजी

*आई श्री मोगल वंदना नामनु पुस्तक सम्पादित थई रह्यु छे जेमा कोइ भाइयो पासे मोगल माँ ना दुहा छंद के चरज भावगीत होय तो प्रविणभाई मधुडा  वॉट्सऐप पर मोकलो*

*_मो नंबर :-97239 38056_*

*अथवा तो नितेना अेड्रेस पर मोकलो*

*।।  अेड्रेस  ।।*
*चारण कवि प्रवीणभा एच मधुडा*
*205 वि वि कोम्पलेक्स भूतखाना  चोक*
*ढेबर रोड राजकोट पिन 360002*

*मो*    *_:-95109 95109_*
       *_:- 97239 38056_*

विश्वभंरी नी स्तुति

आवतिकाल थी शरु थता नवरात्री पर्व नी खूज ज शुभेच्छा.अने ते निमिते विश्वंभरी नी स्तुति

विश्वंभरी अखिल विश्व तनी जनेता
विद्या धरी वदनमा वसजो विधाता दुर्बुद्धिने दूर करी सदबुद्धि आपो माम पाहि ॐ भगवती भव दुःख कापो

भूलो पड़ी भवरने भटकू भवानी
सूझे नहीं लगिर कोई दिशा जवानी भासे भयंकर वाली मन ना उतापो माम पाहि ॐ भगवती भव दुःख कापो

आ रंकने उगरावा नथी कोई आरो
जन्मांड छू जननी हु ग्रही बाल तारो
ना शु सुनो भगवती शिशु ना विलापो
माम पाहि ॐ भगवती भव दुःख कापो

माँ कर्म जन्मा कथनी करता विचारू आ स्रुष्टिमा तुज विना नथी कोई मारू कोने कहू कथन योग तनो बलापो
माम पाहि ॐ भगवती भव दुःख कापो

हूँ काम क्रोध मद मोह थकी छकेलो आदम्बरे अति घनो मदथी बकेलो
दोषों थकी दूषित ना करी माफ़ पापो माम पाहि ॐ भगवती भव दुःख कापो

ना शाश्त्रना श्रवण नु पयपान किधू ना मंत्र के स्तुति कथा नथी काई किधू
श्रद्धा धरी नथी करा तव नाम जापो
माम पाहि ॐ भगवती भव दुःख कापो

रे रे भवानी बहु भूल थई छे मारी आ ज़िन्दगी थई मने अतिशे अकारि
दोषों प्रजाली सगला तवा छाप छापो
माम पाहि ॐ भगवती भव दुःख कापो

खाली न कोई स्थल छे विण आप धारो
ब्रह्माण्डमा अणु अणु महि वास तारो
शक्तिन माप गणवा  अगणीत मापों
माम पाहि ॐ भगवती भव दुःख कापो

पापे प्रपंच करवा बधी वाते पुरो
खोटो खरो भगवती पण हूँ तमारो जद्यान्धकार दूर सदबुध्ही आपो माम पाहि ॐ भगवती भव दुःख कापो

शीखे सुने रसिक चंदज एक चित्ते तेना थकी विविधः ताप तळेक चिते वाधे विशेष वली अंबा तना प्रतापो माम पाहि ॐ भगवती भव दुःख कापो

श्री सदगुरु शरणमा रहीने भजु छू रात्री दिने भगवती तुजने भजु छू
सदभक्त सेवक तना परिताप छापो
माम पाहि ॐ भगवती भव दुःख कापो

अंतर विशे अधिक उर्मी तता भवानी
गाऊँ स्तुति तव बले नमिने मृगानी संसारना सकळ रोग समूळ कापो
माम पाहि ॐ भगवती भव दुःख कापो

मां सोनल आई नो भाव : रचना :- दिलजीतभाई गढवी

*मां सोनल आई नो भाव*

राग..कानूडो काळो काळो..

सोनल मां सूखकारी मढडाना मढवाळी,
तूं आदीने अनादी आई आबू गोख वाळी,
    सोनल मां सूखकारी..टेक

सत शूध कूळ चारण अवतार लई आई,
हमीरबापू नेहे धन कूंख राणबाई,
वरणना विघन हरवा जन्मी तूं
मां जोराळी;
      सोनल मां सूखकारी..1

दिपे तमाणूं देवळ अती तेजथी तेजाळी,
मूरती छे भव्य मानी पवित्र पूण्य वाळी,
आतमना तेजे आखी आ अवनीने उजाळी;
    सोनल मां सूखकारी...2

अक्षर ज्ञान आपी छोरुने सूखी कीधा,
कष्टो बधातें कापी दूःखडाने हरी लीधा,
आई अभणने भणाव्या पाठ सत्तना परचाळी;
     सोनल मां सूखकारी..3

रंक राय ऐक साथे पंगत पिरसाणी,
हेते जमाडे माडी छोरु पोताना
जाणी,
बधा धामथी निराळी आई ऐकता त्यां भाळी;
    सोनल मां सूखकारी...4

अष्टसिध्धी नवनिध्धी समृधी छलकाणी,
दोष ताप पाप काप्या असत अकळाणी,
*दिलजीतनूं* ध्यान राखे कायम मां कृपाळी;
    सोनल मां सूखकारी...5

    *जै  मां  सोनल*
दिलजीत बाटी ना जै माताजी
ढसा जं. मो.9925263039

आई श्री मीनळ मां वंदना : रचना :- दिलजीतभाई गढवी

*आई श्री मीनळ मां वंदना*
            *चरज*
ढाळ..आवा कोई चारणो आवे

दर्शन देजो  देव दयाळी,
मीनळआई मांतू मायाळी;
         दर्शन देजो....टेक

आंख वाळा नव ओळखे तूने
अंतरनी ओळखाण,
ऐवा आई लक्ष्मी माऐ आपीयू माडी पूरण तारु परणाण,
श्रध्धा तेथी जीवने जागी,
लग्नी माना शरणे लागी;
            दर्शन देजो.....1

अनेक परचा आपना माडी विश्वमां विख्यात,
खरा वखते खंतथी आवी तारवा चारण नात,
पोतावट पाळवा वाळी,
वारु थई विहभूजाळी;
             दर्शन देजो....2

ऐज अवतारी आई मीनळ तूं रव वाळी रवराई,
चंडी चामूंडा चारणी तूं छो नेजावाळी नागबाई,
नकी मां तूं मढडावाळी,
प्रगट रुपे आई पूजाणी,
          दर्शन देजो....3

कृपा करीने करणी आवी मावडी मीनळरुप,
चरणे तारे शिष नमावे भयथी मोटा भूप,
सिंहण रुप चारणी तूं छो,
मैखासूर मारणी तूं छो,
         दर्शन देजो.....4

आई अमाणे आंगणे आवो दिव्य देवाने दिदार,
माफ करजे माडी बाळ *दिलजीतना* होय गूना हजार,
सूणी साद साबदी थाजे,
वेगे वारु करवा काजे,
        दर्शन देजो.......5

मां मीनळ आई नी वंदना
जागती ज्योत जगदंबा ने
दिलजीत बाटी ढसा जं. ना
जै माताजी सह करोडो वंदन
*मो.9925263039*

ગુરુવાર, 29 સપ્ટેમ્બર, 2016

चारणी साहित्य : प्रसतूति कवि श्री चकमक

चारणी साहित्य...!

चारणी साहित्यना मुख्य बे विभाग छे. '' पिंगळ साहित्य '' अने ''डिंगळ साहित्य ''
पिंगळ साहित्य ऐटले संस्कृत साहित्यना छंदोनी रचना मुजब मापतालयुकत रचनावाळुं साहित्य. आवुं साहित्य चारणोऐ धणुं लख्युं छे.
डिंगळ साहित्यमां संस्कृतनी रचना मुजबना छंदो नथी. डिंगळी साहित्य तेना शब्दो, शैली तथा रचनाथी थोडां जुदु पडे छे. छतां पण तेमां कोई अजब चमत्कृति अने रस भरेलां छे. डिंगळ साहित्य माटेनुं मुख्य मान चारणोने ज धटे छे.
चारणी साहित्यना बे प्रकार छे. ऐक तो राजाओनी के दाताओनी कृपाथी सजाॅयेलुं अने बीजुं कुदरती प्रेरणामांथी सजाॅयेलुं भकितपरायण अने आत्मलक्षी.
चारणी काव्योमां नबळी वात नथी संधराई. नबळाई प्रत्ये तो कयारेक वक्र बनीने ममॅना ह्रदय भेदथी ऐणे शोयॅने अने स्वमानने जागृत राख्या छे.
साघु, संतो, भकतोऐ जेम जनसामान्यने नवघा भकितना संस्कार आप्या तेम चारणोऐ जनसामान्यने शुद्घ प्रेमना, निष्कलंकताना, शुद्घ आचारना, आत्मगौरवना, प्रजा-प्रेमना, त्याग तथा बलिदानना संस्कार आप्या छे.
जनसामान्यमां आवा उच्च संस्कारोने सदा जागृत राखनारा आ चारणोऐ ज लोकवाताॅओनुं, दुहाओनुं, प्रेम-शोयॅनी कथाओनुं, प्रकृतिप्रेमनुं अने छंदोनुं साहित्य सजॅयुं छे अने जाळव्युं छे.
आज दिन सुघी संधरायेलुं लोकसाहित्य बहुघा आ चारणोने ज आभारी छे.
पू. काग बापुना शब्दोमां कहीऐ तो, '' आ साहित्यनी गंगा ऐ माणसे बांघेली नहेर नथी के ऐकघारी नदीनी माफक चाली जाय. आतो हेमाळाना खोपरा तोडीने पोताना अथाग पराक्रमथी वहेती गंगा छे.

जय माताजी.

प्रस्तुति कवि चकमक.

બુધવાર, 28 સપ્ટેમ્બર, 2016

चारण आईनी वंदना : रचना :- दिलजीतभाई गढवी

*चारण आई नी वंदना*
     ॥     *चरच*    ॥
राग..मारु संदेशो मोकले...

देव दयाळी डूंगरा वाळी आभ कपाळी आई,
वारु थाजो हवे वेगथी माडी बाकूला वाळी बाई,.......1

बाकूला डूंगर बेहणा तारा
नवखंड गूंजे नाम,
धाबळीयाळी ध्रोडजे रुडा करवा अमणा काम;......2

भान भूलीने भूपती आव्यो नागल हूंदा नेह,
पाट पलटावी पलमां ऐनो वरवो कीधो वेह;..........3

घें-घें-घे करी घूधवी मां तूं चारणी सिंहण रुप,
रोष भरेली राजलने नम्यो भयथी दिल्लीनो भूप;.....4

महवाडी काज आवियो बाबी रोकड मागी राळ,
त्यातों जिभ खेंचीने जगदंबा तूं वेगे बणी विकराळ;.....5

आई हटाणू करवा आव्या सू मत भूल्यो शेख,
तेदी' सरधारे सिंहमोई मंडाणी लखवा ऐना लेख;.........6

ओखा धराने उजाळवां आवी
अंबा लई अवतार,
काळा सर्पोनो कोरडो भाळी दैय्तना डोल्या द्वार;.......7

सातिये सावज जोतर्यो माडी
चोराडी चांपबाई,
आभमां उभो राखियो भानू आण आपीने आई;.......8

शिला उपाडी चांचमां उडी आभमा तेदी आई,
राज वाजानू रोळियू मां ते क्रोध करी कागबाई;......9

आई अमीनो विरडो ऐमा नेहनां भरिया नीर,
भावथी भजो भेळियावाळी ने
मां भवनी भांगे भीर;.....10

आई अमाणो आशरो मोटो शिर तणो सरताज,
जावा दये नही जगदंबा कदी लाखू वाते लाज;.........11

ऐज अवतार आप छो माडी मोड सधू महमाई,
*दिलू* माथे अमी द्रष्टी राखो
स्नेहनी *सोनलआई*;....12

आपणा सर्वे चारण जगदंबा ना आराधना माटे मां प्रार्थना

दिलजीतबाटी ना जै माताजी
ढसा जं. मो.9925263039

મંગળવાર, 27 સપ્ટેમ્બર, 2016

आई श्री मोगलमांनो प्रागट्य महोतस्व, भीमराणा

जील्ला कक्षानी रास स्परधामां जामनगर चारण मंडळ प्रथम नंबरे

मां मोगल वंदना : रचना :- दिलजीतभाई गढवी

द्रारकामां कोई तने पुछशे : रचना:- ईशुभाई गढवी

ईशुभाई गढवी रचित एक रचना

द्वारकामां कोई तने पूछशे के काना .
ओली गोकुळमां कोण हती राधा .
   तो शुं रे जवाब दईश माधा ?

तारुं ते नाम तने याद नो'तुं
तेदि'थी राधानुं नाम हतुं होठे .
ठकराणां - पटराणां केटलाय हता
तो ये राधा रमती'ती सात कोठे .
राधाविण वांसळीना वेण नहीं वागे
शीदने सोगंध अेवा खाधा .
तो शुं रे जवाब दईश माधा ?

राधाना पगलामां वाव्युं वनरावन
फागण बनी एमां महेक्यो .
राधाना एकेका श्वास तणे टोडले
अषाढी मोर बनी गहेक्यो .
आज आघेरा थई ग्या कां राधाने वांसळी
एवा ते शुं पड्या वांधा .
तो शुं रे जवाब दईश माधा ?

घडीकमां गोकुळ ने घडीक वनरावन
घडीकमां मथुराना महेल .
घडीकमां राधा ने घडीकमां गोपीओ
घडीक कुब्जा संग गेल .
हेत प्रित न्होय राज खटपटना खेल
कान स्नेहमां ते होय आवा सांधा
तो शुं रे जवाब दईश माधा ?

*कृष्णनो जवाब ::--*

गोकुळ वनरावन ने मथुरा ने द्वारका
एे तो पंड्ये छे पहेरवाना वाघा .
राजीपो होय तो अंग पर ओढीये
नहीं तो रखाय एेने आघा .
आ सघळो संसार मारा सोळे शणगार
पण अंतरनो आतम एक राधा .
हवे पुछशो मां कोई मने कें कोण हती राधा ?

*रचना :- ईशुभाई गढवी*
*_टाईप :-  charantv.blogspot.com_*

સોમવાર, 26 સપ્ટેમ્બર, 2016

आई श्री सोनल वंदना : रचना :- दिलजीतभाई गढवी

*आई  श्री  सोनल  वंदना*
             *चरज*
ढाळ..मालम मोटा हलेसा मार

हे..आंगण आज पधार्या आई हशे कांई पूर्वोनी पूनाई..टेक

ढोल त्रांबाळू धणधणे ने सूर मीठा शहेनाई,
हे..अबिल गूलाल उडे आंगणिये ने चरजू त्या संभळाय रे,
आंगण आज  ....1

आनंद लेरु आज अंतरमा हैये हरख नो माय,
ह..सामैयामा शोभता माडी आभ कपाळी आई रे,
आंगण आज...2

चारण छोरु सौ साथे मळीने हरखे  गूंथे हार,
हे..फूलडे वेरी सघळी शेरी दिप पेटाव्या द्वार रे,
आंगण आज...3

गाम अमाणूं गोकूळ दिसे ने करणी ऐमा कान,
हे..सौ छोरुडा नाचे ताले भाव मा भूली भान रे,
आंगण आज....4

मानव मेरामण उमट्यो ने हैये हैयू दळाय,
हे..सहूनी सूरतामा चंडी ऐकतूं
भेळिया वाळी भळायरे,
आंगण आज...5

आई दयानो दरियो मोटो मां वालपनो वरसाद,
हे..सत्तना चिले चालशू तो आई राखे आबादरे,
आंगण आज...6

सवळी राहे मां सोनल वाळे अवळी छोडो आज,
हे..उद्धार करवा अंबा आवी चारणो नी सरताजरे,
आंगण आज...7

पाये पडी सौ पावन थाये टळिया त्रिवीध ताप,
हे..ऐक घडीमा अळगा कीधा
पंड्यना सघळा पापरे,
आंगण आज...8

आरदा सांभळी अंबा आवी मनमा लावीने म्हेर,
हे..द्वार दिपाव्या दिव्य दयाळी लाखू वाते ल्हेररे,
आंगण आज...9

हेते हालरडां गाई हिंचकावजे
पूरजे अंतर आश,
हे..भेळियावाळी भजू *दिलू*
भेवलियो खंमा करजो खासरे
आंगण आज...10

आ भाव गीत 1994 मा प्रथम वखत ढसा जं. मूकामे समस्त चारण समाज द्वारा सोनल बीज उजववानी शरुआत करेली त्यारे लखायेली प्रार्थना मां सोनल वंदना
(सोनल बीज हजू उजवाय छे)

दिलजीत बाटी ढसा जं ना
जै माताजी. मो.9925263039

રવિવાર, 25 સપ્ટેમ્બર, 2016

कहे राधे प्यारी हुं बलिहारी गोकुल आवो गीरधारी

.            जय माताजी

कवि श्री पिंगळशीभाई पाताभाई नरेला रचित एक रचना

*कहे राधे प्यारी हुं बलिहारी गोकुल आवो गीरधारी*

बारमासी त्रीभंगी छंद

कहुं मास काती तिय मद माती , दीप लगाती रंगसती .
मंदिर महेलाती सबे सुहाती मै डर खाती झझकाती .
बिरहे जलजाती नींद न आती लखी न पाती मोरारी .
कहे राधे प्यारी हुं बलिहारी गोकुल आवो गीरधारी . *_||1||_*

मागशर मासी धर्म प्रकासी रुतु हुलासी सबभासी .
मै फिरु उदासी नाख्य निसासी , चित चपलासी अकुलासी .
अन नहीं अपवासी वृत्ति अकासी नहीं विसवासी मिलवाही .
कहे राधे प्यारी हुं बलिहारी गोकुल आवो गीरधारी . *_||2||_*

पोशे पछताई शिशिर सुहाई थंड लगाई सरसाई .
मन मथ मुरजाई रह्यो न जाई वृज दु:खदाई वरताई .
शुं कहुं समजाई वेदवताई नहीं जुदाई नरनारी .
कहे राधे प्यारी हुं बलिहारी गोकुल आवो गीरधारी . *_||3||_*

मा महिना आये लगन लखाये मंगल गाये रंग छाये .
बहु रेन बढाये दिवस घटाअे कपट कहाअे वरताअे .
वृजकी वनराये खावा धाअे . वात न जाये विस्तारी .
कहे राधे प्यारी हुं बलिहारी गोकुल आवो गीरधारी . *_||4||_*

फागुन प्रफुलीतं बेल ललीतं कीरकलीतं . कोकिलं .
गावत रसगीतं , वसंत वजीतं दन दरसीतं दु:खदिल .
पहेली कर प्रीतं , दूर करितं , नाथ अनितं , नहीं सारी .
कहे राधे प्यारी हुं बलिहारी गोकुल आवो गीरधारी . *_||5||_*

मन चईतर मासं ,अति उदासं पति प्रवासं , नहिं पासं .
बन बने बिकासं , प्रगट पलासं , अंब फलासं , फळ आसं .
स्वामी सहेवासं , दीअे दिलसं , हीअे हुलासं , कुजबारी .
कहे राधे प्यारी हुं बलिहारी गोकुल आवो गीरधारी *_||6||_*

वैशाखे वादळ पवन अप्रबळ अनळ प्रगट थळ तपत अति .
सोहत कुसुमावळ चंदन शीतळ हुई नदीयां जळ मंद गति .
कीनो हमसे छळ आप अकळ कळ नहीं अबळा बळ बत वारी .
कहे राधे प्यारी हुं बलिहारी गोकुल आवो गीरधारी *_||7||_*

जेठे जगजीवन सुके बनबन घोर गगन घन सजत घटा .
भावत नहीं भोजन जात बरस दन करत त्रीया तन काम कटा .
तलफत ब्रजके जन नाथ निरंजन दिया न दरशन दिलधारी .
कहे राधे प्यारी हुं बलिहारी गोकुल आवो गीरधारी *_||8||_*

अषाढ उचांर , मेघ मलांर , बनी बहारं , जलधारं .
दादुर हकारं , मयुर पुकारं , तडिता तारं , विस्तारं .
नां लहि संभारं , प्यास अपारं , नंदकुमारं , नीरख्यारी ,
कहे राधे प्यारी हुं बलिहारी गोकुल आवो गीरधारी *_||9||_*

श्रवण जल बरसे सुंदर सरसे बद्धर भरसे अंबरसे .
तरुवर गिरिवरसे लता लहरसे नदीया परसे सागरसे .
दंपती सुख दरसे सेज समरसे लगत जहरशे दु:खकारी .
कहे राधे प्यारी हुं बलिहारी गोकुल आवो गीरधारी *_||10||_*

भाद्रव हद भरीया गिरिवर हरिया, प्रेम प्रसरिया तनतरीया .
मथुरामें गरीयाफेर नफरीया कुबजा वरीया वस करिया .
वृजराज विसरीया काज न सरीया मन नहीं ठरीया हुं हारी .
कहे राधे प्यारी हुं बलिहारी गोकुल आवो गीरधारी *_||11||_*

आसो महीनारी आसवधारी दन दशरारी दरसारी .
नवनिधि निहारी चढी अटारी वाट संभाळी मथुरारी .
भ्रखुभान दुलारी कहे पुकारी तमे थयारी तकरारी .
कहे राधे प्यारी हुं बलिहारी गोकुल आवो गीरधारी *_||12||_*

आशो अधिकारं , धर्म वधारं , प्रभु पधारं , कर प्यारं .
सुख अेज सुधारं तेज अपारं नाथ निहारं वृज नारं .
युगल अवतार *पिंगळ* प्यार छंत स्विकार सुखकारी .
कहे राधे प्यारी हुं बलिहारी गोकुल आवो गीरधारी *_||13||_*

*रचियता :- कवि श्री पिंगळशीभाई पाताभाई नरेला*

टाईप :- मनुदान गढवी

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