ચારણત્વ

" આપણા ચારણ ગઢવી સમાજની કોઈપણ માહિતી,સમાચાર અથવા શુભેચ્છાઓ આપ આ બ્લોગ પર પ્રકાશિત કરવા માગતા આ વોટ્સએપ ન.9687573577 પર મોકલવા વિંનતી છે. " "આઈશ્રી સોનલ મા જન્મ શતાબ્દી મહોત્સવ તારીખ ૧૧/૧૨/૧૩ જાન્યુઆરી-૨૦૨૪"

Sponsored Ads

લેબલ कवि श्री पिंगळशीभाई पाताभाई नरेला रचीत रचनाओ. સાથે પોસ્ટ્સ બતાવી રહ્યું છે. બધી પોસ્ટ્સ બતાવો
લેબલ कवि श्री पिंगळशीभाई पाताभाई नरेला रचीत रचनाओ. સાથે પોસ્ટ્સ બતાવી રહ્યું છે. બધી પોસ્ટ્સ બતાવો

સોમવાર, 11 સપ્ટેમ્બર, 2017

गौकुळ आवो गीरधारी : रचना :- पिंगळशीभाई पाताभाई नरेला

छंद त्रिभंगी प्रख्यात, लोकप्रिय ॥बारमासी छंद॥ भावनगर राजकवि पिंगळ्शीभाई पाताभाई नरेला

🌺 *भावनगर राजकवि पिंगळ्शीभाई पाताभाई नरेला*🌺
.                 टाइप :- मोना गढ़वी, अमदावाद.

*।।छंद त्रिभंगी ।।*  प्रख्यात, लोकप्रिय  *॥बारमासी छंद॥*

आषाढ ऊच्चारं, मेघ मलारं, बनी बहारं जलधारं।
दादुर डकारं, मयुर पुकारं, सरिता सारं विस्तारं।
ना लही संभारं, प्यास अपारं, नंद कुमारं निरधारी।
कहे राधे प्यारी, मैं बलिहारी, गौकुळ आवो गीरधारी !! 1

श्रावण जळ बरसे, सुन्दर सरसे, बादळ वरसे अंबर से।
तरवर गिरवरसे, लता लहर से, नदियां सरसे सागर से।
दंपति दुख दरसे, सैज समरसे, लगत जहर से दुखकारी।
कहे राधे प्यारी, मैं बलिहारी, गौकुल आवो गिरधारी !!  2

भाद्रव भरिया, गिरवर हरिया, प्रेम प्रसरिया तन तरिया।
मथुरा में गरिया, फैर न फरिया, कुब्जा वरिया वश करिया।
ब्रजराज बिसरिया, काज न सरिया, मन नहीं ठरिया हुं हारी।
कहे राधे प्यारी, मैं बलिहारी, गौकुळ आवो गिरधारी !!          3

आसो महिनारी, आश वधारी, दन दशरारी दरशारी।
नव निद्धि निहारी, चड़ी अटारी, वार संभारी मथुरारी।
वृषभानु दुलारी, कहत पुकारी विनवीये वारी वारी।
कहे राधे प्यारी, मैं बलिहारी, गौकुळ आवो गिरधारी !! 4

कहुं मासं काती, तिय मदमाती, दिप लगाती रंग राती।
मंदिर महलाती, सबे सुहाती, मैं हरखाती जझकाती।
बिरहे जल जाती, नींद न आती, लखी नपाती मोरारी।
कहे राधे प्यारी, मैं बलिहारी, गौकुळ आवो गिरधारी !! 5

मगसर शुभ मासं, धर्म प्रकाशं, हिये हुल्लासं जनवासं।
सुन्दर सहवासं, स्वामी पासं, विविध विलासं रनिवासं।
अन्न नहीं अपवासं, व्रती अकाशं, नहीं विश्वासं मोरारी।
कहे राधे प्यारी, मैं बलिहारी, गौकुळ आवो गीरधारी !!   6

पौषे पछताई, शिशिर सुहाई, ठंड लगाई सरसाई।
मन मथ मुरझाई, रहयो न जाई, बृज दुखदाई वरताई।
शुं कहुं समझाई, वैद बताई, नहीं जुदाई नर नारी।
कहे राधे प्यारी, मैं बलिहारी, गौकुल आवो गिरधारी !! 7

माह महिना आये, लगन लखाये, मंगळ गाये रंग छाये।
बहु रैन बढाये, दिवस घटाये, कपट कहाये वरताये।
वृज की वनराये, खावा धाये, वात न जाय विस्तारी।
कहे राधे प्यारी, मैं बलिहारी, गौकुळ आवो गिरधारी !! 8

फागुन प्रफुल्लितं, बेल ललितं, कीर कलीतं कौकीलं।
गावत रस गीतं, वसन्त वजीतं, दन दरसीतं दुख दिलं।
पहेली कर प्रीतं, करत करीतं, नाथ अनीतं नहीं सारी।
कहे राधे बलिहारी, मैं बलिहारी, गौकुळ आवो गिरधारी!! 9

मन चैत्र मासं, अधिक ऊदासं, पति प्रवासं नहींपाये।
बन बने बिकासं, प्रगट पलासं, अंब फळांसं फल आये।
स्वामी सहवासं, दिये दिलासं, हिये हुल्लासं कुबजारी।
कहे राधे प्यारी, मैं बलिहारी, गौकुळ आवो गिरधारी !!  10

वैशाखे वादळ, पवन अप्रबळ, अनल प्रगट थल तपति अति।
सौहत कुसुमावल, चंदन शीतल, हुई नदियां जळ मन्द गति।
कियो हमसे छळ, आप अकळ कळ, नहीं अबळा पत पतवारी।
कहे राधे प्यारी, मैं बलिहारी, गौकुळ आवो गिरधारी !!              11

जेठे जगजीवन, सुके बन बन, घोर गगन घन चढत घटा।
भावत नहीं भौजन, जात वरस दन, करत प्रिया तन काम कटा।
तड़फत ब्रज के जन, नाथ निरंजन, दिया न दरशन दिलधारी।
कहे राधे प्यारी, मैं बलिहारी, गौकुळ आवो गिरधारी !!           12

🌺 *भावनगर राजकवि पिंगळ्शीभाई पाताभाई नरेला*🌺

टाइप :- मोना गढ़वी, अमदावाद.

સોમવાર, 16 જાન્યુઆરી, 2017

निर्मान रेहना श्रेष्ठ नर : रचना :- पींगळशीभाई पाताभाई नरेला

निर्मान  रेहना  श्रेष्ठ  नर.

रचयिता : राजकवि पिंगळशीभाई  पाताभाई नरेला. भावनगर

                             दोहो

सोई  सत्य  सदज्ञान  हे ,  धर्म  दानमें  ध्यान ,

मान   जूठ  मनमें   नही,  सबका  प्रान समान.

                छंद   हरिगीत

सब प्रान ऐक समान जानत,  धर्म में द्रढ ध्यान हे ,

शुभ कर्ममें चित संत संगती, जूठ कबु न जीभान हे.

विद्याय  परगुन  गान वर्नत , कुलमणी। निष्काम हे,

निर्मान   रेहना  श्रेष्ठ  नर  सद्ज्ञान  उनका  नाम  हे ...........1

यह जकत  मिथ्या  हे उपाधि , सत्य कीर्ति सर्वदा,

वेहवारमें  हे अनंत व्याधि  अधिक  तनमें  आपदा,

सुखरूप ईश्वर  भजन साधन मन  ठरन को ठाम हे,

निर्मान  रेहना  श्रेष्ठ  नर   सदज्ञान  उनका  नाम  हे............2

अपना नही ऐ माल धन ,  स्वपना की बाजी सर्व हे,

अपना  करी फिर मानता ओ तो गुप्त मनका गर्व हे,

याते  करो  सुकृत  कछु   वट  पंखी का विश्राम हे,

निर्मान  रेहना  श्रेष्ठ  नर  सदज्ञान  उनका  नाम  हे.............3

continue.

संकलन :  अनिरुद्ध  जे. नरेला.

जागोने जदुरायजी : रचना :- पिंगळशीभाई पाताभाई नरेला.

रचयिता  : राजकवि  पिंगलशीभाई  पाताभाई  नरेला. भावनगर

                              रामकली

जागोने  जागोने  जदुरायजी ,  मोहन  जोवे  ते  मागो ,

दर्शन   आपो   दासने ,   त्रिकम  आळस  त्यागो....जागोने.....1

रविऐ  रथ   शाणगारीया-अळगु   थयु  छे  अंधारु ,

गोकुळ  सूंदर  गामडू ,  सहु ने  लागे  छे  सारू.......जागोने....2

गौ  लइ  लइ  गोवालिया   आंगणीयामां  आवे ,

मित्र   कहीने   मावजी ,   बहु  हेतेथी  बोलावे.......जागोने.....3

सरखे  सरखी  साहेलडी ,जाय   जमुनाना  पाणी,

महिडा  लइ   मैंयारीयु ,  तम  काजे  रोकाणी.........जागोने....4

जिवन   झटपट  जागीया , विनति  सुणी  वनमाली,

पिंगलसी  के  प्रभातमां ,   मूर्ति   जोई   मरमाली......जागोने....5

संकलन :  अनिरुद्ध  जे. नरेला.

Featured Post

ચારણ સમાજનું ગૌરવ શ્રીજયરાજદાન ગઢવી સાહેબ

અભિનંદન સંદેશ "સમગ્ર ચારણ-ગઢવી સમાજનું ગૌરવ અને કર્મનિષ્ઠ પોલીસ અધિકારી, આદરણીય જયરાજસિંહ ગઢવી સાહેબને પી.એસ.આઈ. (PSI) થી પ...