ચારણત્વ

" આપણા ચારણ ગઢવી સમાજની કોઈપણ માહિતી,સમાચાર અથવા શુભેચ્છાઓ આપ આ બ્લોગ પર પ્રકાશિત કરવા માગતા આ વોટ્સએપ ન.9687573577 પર મોકલવા વિંનતી છે. "

Sponsored Ads

મંગળવાર, 15 માર્ચ, 2016

कवि श्री दादनी रचना

कवि श्री दादनी एक रचना
मारा फळियाना वड केरी डाळे
    हींसको हीरले भरीयो.
पंखीडा आवी आवीने उडी जाय ..... टहुको तारो सांभरीयो .....
तने वढवाना घणाय मनमां कोड ,
पण तें गुंनो ना एकेय करीयो .
तारा दु:खमां हुं भागीदार थाउं .
पण तें निसासो ना एकेय, भरीयो..(के)..टहुको तारो  सांभरीयो ,
धीडी (दीकरी) तुं हसमुखी अने हेताळ.
वालपनो जाणे विरडो.
तारा गीतडे मधमधे आखुं गाम .
चौटो ने पाणी शेरडो. .(के)..टहुको तारो  सांभरीयो ,
तारो बापु ! अे बापु ! केरो साद.
गुंजामा भरी में तो राखीयो.
ज्यारे आवे छे तारी बहु याद.
त्यारे छानो छानो चाखीयो. .(के)..टहुको तारो  सांभरीयो ,
भाईना मीठडां लीधेला आठे पोर .
ई टचकडाअे ओरडो भरीयो.
टचकडा उघाडे छे तारो वीर .
एनाथी एकेय ना उपड्यो . .(के)..टहुको तारो  सांभरीयो ,
धीडी तें गजा उपरवट कीधां काम .
डील(शरीर) नो ना धडो करीयो.
तें मांड रे उघाडी . ज्या आंख्य .
त्या तो वरघोडो आवी उभो रीयो. .(के)..टहुको तारो  सांभरीयो ,
धीडी तारी अेटली छे गरवाई.
के गरवो टुंको पडीयो.
तने सौ सौ सलामुं मारा फुूल.
तारी पांहे "दाद" हु नानो पडीयो. (के) ..टहुको तारो सांभरीयो..
आ रचना मोकलवा बदल श्री मोरारदान भाई नो आभार.
टाईपमां भुल होयतो क्षमा करजो
रतयता :- कवि श्री "दाद"
टाईप   :- मनुदान गढवी - महुवा
         वंदे सोनल मातरम्


Featured Post

केसरी सिंह बारहठजी को जन्मजयंती पर शत् शत् वंदन

केसरी सिंह बारहठ (२१ नवम्बर १८७२ – १४ अगस्त १९४१) एक कवि और स्वतंत्रता सैनानी थे। वो भारतीय राज्य राजस्थान की चारण जाति के थे। उ...