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શુક્રવાર, 25 નવેમ્બર, 2016

पद्मश्री दुला भाया काग (भगत बापु)नी जन्म जयंती

आजे(ता.25-11-2016) ऐटले  पद्मश्री दुला भाया काग (भगत बापु)नी जन्म जयंती  छे


आजे काग बापु ना टुंकमां परिचय साथे तेमना स्वरमां अप्राप्य ऑडियो मुकवानो नानकडो प्रयास करेल छे.

पद्मश्री कवि दुला भाया काग (भगत बापु ) नो संक्षिप्तमां परिचय  

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नाम          :- दुला भाया काग
पितानुं नाम :- भाया काग
जन्म तारीख :- 25-11-1902
जन्म स्थळ  :- मजादर 
अभ्यास    :- पांच धोरण
काव्य ग्रंथ :- कागवाणी भाग 1 थी 7
भारत सरकार द्रारा ता.26-01-1962 ना रोज पद्मश्री ऐवोर्ड थी पुरस्कृत करवामां आवेल
अवशान :- फागण - सुद-4 अने ता. 22-02-1977

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पद्मश्री दुला भाया काग (भगत बापु)नी जन्म जयंती ऐ कोटी कोटी वंदन


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        वंदे सोनल मातरम् 







विडियो 

1-TARI SHITAL CHHAYADI


2-KAG BAPU NO PARICHAY


3- BHARAT MILAP

4- JAM AJAJI NI VAAT


तारी शीतळ सायलडीमां : रचना :- दुला भाया काग

*आजे कविश्री दुला भाया काग (भगत बापु)नी 113 मी जन्म जयंति छे*
ते निमिते तेमनी रचेल अेक कवितानुं रचपान करीअे

तारी शीतळ छांयलडीमां सौने सुवरावी .
तुं तपजे तारा संताप ऐकलो ,
जळ तरवा सागरनां सौने साथे लेजे ,
बुडी जाजे आशाभर्यों तुं ऐकलो

तारी शीतळ छांयलडीमां सौने सुवरावी .( टेक )

तारी फोरममां फोरम ,  सौ कोईने भेळ वजे ,
तुं थाजे बदबोनो , धणी ऐकलो ,
फलफुलनां घावोमां ., साथीने आडा देजे ,
तुं सहेजे घणोना , घाव ऐकलो ,

तारी शीतळ छांयलडीमां सौने सुवरावी .........

कोई निर्दोषी फांसी , लटकेलने जिवाडी ,
चडी जाजे शुळी , पर तुं ऐकलो ,
तारां वस्त्रोनी पांखे , सौने ढांकी देजे ,
बस रे"जे उघाडो , तुं ऐकलो

तारी शीतळ छांयलडीमां सौने सुवरावी .......

धन छोळ्युं रेलवजे , सौने वहेंची देजे ,
लई लेजे गरीबी , भाग ऐकलो ,
तारो वैकुंठने केडे , जगतने तेडां करजे ,
बस जाजे दोजखमां , तुं ऐकलो

तारी शीतळ छांयलडीमां सौने सुवरावी .......

खुशकुशनां मेवाने , सहु आगळ धरी देजे ,
भरी लेजे उना , निसासो ऐकलो ,
चौद रत्नो मंथनना , विष्णुने दई देजे ,
शिव थाजे , सागरकिनारे ऐकलो ,

तारी शीतळ छांयलडीमां सौने सुवरावी ......

चिरंजीवीओने , धरणीना छेडा दई देजे ,
चणी लेजे काची , मढुली ऐकलो ,
रण लडतां लडथडता , क्षुद्रोने रोवा देजे ,
तुं हसजे हारीने , हैये ऐकलो ,

तारी शीतळ छांयलडीमां सौने सुवरावी ......

हुशियारीनी गांसडीओ , सौने बंधवजे ,
छेतराजे समज्या , छतां तुं ऐकलो ,
कोई रक्तोना , तरस्यानी तृष्णा ओलववा ,
तुं पाजे तारां रुधिर , ऐकलो ..

तारी शीतळ छांयलडीमां सौने सुवरावी ......

तारा हंसोना टोळामां , सौने हेळवजे ,
पण रे " जे तुं तारे , "काग" ऐकलो ..
तारां सुंदर वाजिंत्रो , मित्रो ने दई देजे ,
लई लेजे तारो , तंबुर ऐकलो ...

तारी शीतळ छांयलडीमां सौने सुवरावी ........

रचयता पद्म श्री दुला भाया काग (भगतबापु )
*```टाईप :-  charantv.blogspot.com ```*

*चारण गौरव भग्तकवि पद्म श्री दुला भाया काग ना जन्मदीन नी हार्दीक वधायुं*

.               *वंदे सोनल मातरम्*

ગુરુવાર, 24 નવેમ્બર, 2016

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