ચારણત્વ

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શનિવાર, 31 ડિસેમ્બર, 2016

आई श्री सोनलमां नुं जीवन चरीत्र : लेखक :- आशानंद सुराभाई गढवी

                 जय माताजी

*आजे सोनलबीज अेटले आई श्री सोनलमां नुं जीवन चरीत्र आप समक्ष मुकवानुं नानकडो प्रयास करेल छे*

भारत वर्षनी पावन भूमि पर गुर्जरधराना सोरठ प्रदेशमां जुनागढ जिल्लामां केशोद नजीक मढडा नामना नानकडा गाममां तुंबेल गोत्रनी मोड शाखमां गढवी हमीर माणसुरना घेर माताजी राणबाईनी कुंखे वि.सं. 1980 पोष सुद बीज आठमी डिसेम्बर 1924 मंगळवारना सांजे 8:30 वाग्ये एेक तेजस्वी दीपनुं प्रागट्य थयुं .

*पोष शुकल बीज सुख दाई . चारण गृहे अंबा आई.*
*सायम समये भूमि सुत बारा . शीतल समीर शीत अपारा.*

संत स्वभावना पिताजी हमीर मोड ना आ पांचमी पुत्री हता. पुत्र नी आश राखना भारतीय समाज मां चार पुत्रीअो पछी पांचमुं संतान पुत्र आवे अेवी आशा स्वभाविक छे.
तेथी पांचमी पुत्री जन्मता आनंद न थाय परंतु अहिंया उलटुं हतुं हमीरबापुने अगाउ थई गयेल आ सोनबाईमां  सराकडीया वाळाअे वचन आप्युं हतुं के तमारी पांचमी पुत्री जगदंबानो अवतार हशे अने अे दिकरी मोड कुळ साथे समस्त चारण जाती अने हिंदु संस्कृतिनो उद्दार करशे.
तेथी हमीरबापु पुत्री जन्मना समाचार मळता ज हर्षित बनी नाची उठ्या हता भगवान रामना जन्मना समाचार सांभळी जेवो आनंद महाराजा दशरथने थयो हतो तेवो आनंद हमीरबापुने थयो. हमीरबापुअे भाईओने बोलावी उत्सव कर्यो अने मीठाई वहेंची ब्राह्मणोने दान आपी संतुष्ट कर्या . माताजी नुं नाम सोनबाई पाडवामां आव्युं बाळक सोना खूब ज स्वरुपवान हता. साथे तीव्र बुद्धिशक्ति अने होशियार हता. स्मृतिशक्ति तो गजबनी हती.जन्मजात मनस्वी हता.
पोतानुं धार्यु करता आईमां गीतो अने हरिरस दोहा बोलता मधुरकंठथी रामायणनी कथा संभळावता . अेमनो कंठ बुलंद हतो अने तेमने संगीत तरफ भारे आकर्षक हतुं .पूज्य माताजी सामान्य शाळामां न भण्या परंतुं जगतने पाठ भणाववा माटे जीवननी पाठशाळामां भण्या हता 
आई श्री सोनाबाई माताजीनी योग्य उंमर थता माताजी राणबाईना अति आग्रने वश थई लग्न करवा पड्या परंतुं लग्न दिवसे ज ब्रह्मचर्यना आजीवन तेमणे घोषणा करी हती.
माताजी रणबाईमां तथा हमीरबापुना स्वर्गवास पछी आईमांअे अनेक तीर्थयात्राओ करी.
आई मां नवरात्री महोत्सव मढडामां धामधुमथी उजवता .
आईमांअे चारण समाज नो उद्धार करवा समस्त भारत वर्षनो प्रवास कर्यो दरेक प्रदेशमां दरेक चारण गाममां गया देवी पुत्र चारणोनी दुर्दशा जोई दु:खी थया जे चारणो कविकुळना वारसदार हता जे चारणो देवी  विचारोना वाहक हता जे चारणोना घेर आई खोडीयार , आवड , करणी , नागबाई , जेवी जोगमायाओ  जन्मी हती जे कुळमां सांयाजी झुला , ईसरदासजी , कागबापु जेवा अनेक कविओ संतो भक्तो साहित्य कारो जन्मया हता ते दैवी कुळनी दुर्दशा जोई आईमां खूब ज दु:खी थया आईमाअे चारणोना गामडे गामडे घेर घेर जई सत्य वात समजावी चारणी अस्मिता फरी जागृत करवा तनतोड प्रयत्नो कर्या.
चारणोना भव्य अने अने दिव्य गौरवशाळी ईतिहासनी अमर कथाओ आईमांअे चारणोने संभळावी समस्त भारत वर्षना चारणोने एेक मंच पर लाववा माटे वि.सं.2010 वैशाख सुद 3 बुधवारना आईमांअे मढडामां चारण संमेलन बोलाव्युं अने अेमा समाज सुधारणाने लगता अनेक ठरावो थया आईमांअे आझादीनी लडतमां पण सारी रीते  भाग लीधो हतो.
जुनागढना नवाबने जुनागढ छोडी जवा समजाव्युं अने राजपुतो अने चारणोने तेना स्वतंत्र गामो भारतसंघ साथे जोडी देवा आज्ञा करी जुनागढ भारतसंघ साथे जोडाय अेमा आपणुं हिंत छे.अे वात समजाववा आईमां गामडे गामडे घुम्या
आईमां मढडा छोडी *कणेरी* गाममां वसवाट कर्यो फरी फरी सौराष्ट्र कच्छ अने राजस्थान ना प्रवासो कर्या आईमां 11 वखत कच्छ मां पधार्या हता.कच्छ मां चारण गामोने पोतानी पद रज वडे पावन कर्या . गामडामां घर करी गयेल व्हेमो , अंधश्रद्धा , कुरिवाजो , दारु , अफीण , जेवा व्यसनो , दहेज प्रथा , कन्या विक्रम बली चडाववी जेवा अनेक दुषणो दुर करवा आईमांअे अथाक प्रयत्नो कर्या .तेमना प्रयत्नो थी कच्छ मां चारण छात्रालय नो प्रारंभ थयो तेओ शिक्षण पर खूब ज भार मुकता कन्या कळवणीना खास हिमायत हता .
आईमांअे चारण माताजीओने पोतानो गौरव पुर्ण वारसो जाळवी राखवा हाकल करी हती. तेमना प्रयत्नो थी अनेक लोकोना जीवनमां परिवर्तन आवयुं हतु. समाज ना आगेवानो सक्रीय बनीने सजनु् कार्य करवा लाग्या हता.अनेक लोकोअे धर्म , संस्कृति अने राष्ट्रनुं काम करवा प्रेरणा पुरी पाडी हती. मारु , काछला , तुंबेल , परजीया , सोरठीया , अगरवच्छा , गुजरा , अने सिंधिया जेवा प्रदेश भेदो अने 23 गोत्रो साडा त्रण पहाडामां वहेंचायेल चारण समाज ने संगठीत करवा आईमांअे अथाक प्रयत्नो कर्या . फक्त चारणो नहिं सोनी,मेर,मैया,जेवी अनेक ज्ञातिओमां सुधारणा लाववा माटे तेओ जीवनभर मथता रह्या. समस्त भारत देशना चारणो एेक बनीने जुनागढ मां आईमांनो वन प्रवेश महोत्सव उजव्यो,
माताजीने चांदीथी तोळवामां आव्या , तेमनी यादमां मढडाने मढडा सोनल धाम नाम आपवामां आव्युं
आईमां जे कार्य माटे आव्या हता ते कार्य माटे ते पुरु थयुं होवाथी वि.सं. 2031 कारतक सुद 13 तारीख . 27//11//74 बुधवारना वहेली सवारे प्रभात 5:15 वाग्ये आ पंच महाभुतना देहनो त्याग करी परमतत्वमां लीन थया , पू. आईमांना पार्थिव देहनो तेमना निवासस्थाने कणेरीमां अग्निदाह आपवामां आव्यो त्यारे हजारो नहिं  बल्के लाखो भक्तोनी आंखमांथी अश्रुधारा वहेवा लागी.आईमांना स्वधागमन बाद पछीना वर्षथी ज समग्र भारतमां तेमना जन्म दिवस - *सोनलबीज  तरीके उजववानो प्रारंभ थयो , पोष सुद - 2 ना दिवसे चारणो प्रभातना वहेला उंठीने एेक बीजाने जय माताजी  कहि भेटे छे.*
*सोनलबीज चारणो माटे नुतन वर्ष समान बनी रही छे. आखा गुजरातमां जन्मोतस्व समारोह होय छे.*

*लेखक :- आशानंद सुराभाई गढवी*
              झरपरा,मुंद्रा,कच्छ,

*संदर्भ :- आशानंदभाई गढवी द्वारा कच्छमित्रमां छपायेल लेख मां थी*

*_टाईप :- charantv.blogspot.com

                   *वंदे सोनल मातरम्*

ગુરુવાર, 29 ડિસેમ્બર, 2016

आई सोनल माडी सांभरशे

चारण कवी आपाभाइ नी चारण ने सोनल माताजी क्यारे याद आवे छे, सोनलमाडी केदी सांभरशे... एवी आइ सोनल नी अति सुंदर रचना

........ दोहा .......

आ जपसे चारणघर, जेदी आयुं अवतरसे..
ए वखत हामांतणी, अमुं सोनल सांभरसे....१

तेडुं जो ग्न्याती तणुं, जेदी आंगण आदरसे..
ए वखत हामांतणी, अमुं सोनल सांभरसे....२

विध्याधन पामी विमळ, जेदी मान बधे मळसे..
ए वखत हामांतणी, अमुं सोनल सांभरसे....३

..........रचना........

अवसर आदरसे, वित्त वावरसे, कोइ संमेलन जो करसे..
पकवान पिरससे, पंगत पडसे, हरिहर मुख हाकल पडसे..
सतमारग चडसे, भणतर भणसे, व्रण चारण प्रगति करसे..
ए वखत अमाणी मढडावाळी सोनलमाडी सांभरसे, आइ सोनलमाडी सांभरसे.....

नवरात उजवसे, गरबा गासे, मंडप थासे मात तणो..
दशेरा दिवासे, ओछव थासे, छंद गवासे चंद तणो..
जेदी आसो मास, श्वासे-श्वासे, गाम कणेरी उचरसे..
ए वखत अमाणी, मढडावाळी, सोनलमाडी सांभरसे...जी सोनलमाडी सांभरसे....

सोरठ संचरता, गरवो चडतां, दश मढडा द्रष्टि करतां..
अंबा उचरतां, शीष नमवतां, आशिष नी व्रष्टि पडता..
कोइ मळता, याद अपवता, आइ नवि कोइ अवतरसे..
ए वखत अमाणी मढडावाडी, सोनलमाडी सांभरसे....जी सोनलमाडी सांभरसे...

रमती रखवाळी, बूढी-बाळी, लोबडीयाळी, लटकाळी...
गरवा हेताळी, मां ममताळी, नवयुगभाळी नेजाळी..
दरियाव दयाळी, मुख मर्माळी, कविओ जे कविता करसे..
ए वखत अमाणी, मढडावाळी, सोनलमाडी सांभरसे....जी सोनलमाडी सांभरसे....

धन धन व्रतधारी, द्रढ ब्रह्मचारी, तूं अवतारी, अनपूर्णा..
मांगुं हुं माडी, आशिष तारी, नजर तिहारी अमिझरणा..
"कवि आप" अमाणी, तुं हितकारी, शक्ति घरघर संचरसे..
ए वखत अमाणी मढडावाळी, सोनलमाडी सांभरसे....जी सोनलमाडी सांभरसे....

रचना -- कवि आपाभाइ गढवी

जय माताजी
जय मां सोनल
आपनो दिवस शुभ रहे।

બુધવાર, 28 ડિસેમ્બર, 2016

सोनलबीज उजवणीना फोटा

.                          जय माताजी

तारीख 31//12//2016 ने पोष शुद बीज अेटले (सोनलबीज)

आपणा गाम शहेर के आजु बाजु ज्यां पण *सोनलबीज* नी उजवणी थती  होय  त्यानां फोटाओ *चारणत्व* ब्लॉग पर मुकवानो विचार छे.
तो सहकार आपवा विनंती छे.

आप *सोनलबीज* उजवणीना फोटओ निचेना WhatsApp नंबर पर मोकलवा विनंती छे.
     मनुदान गढवी :- 9687573577

अथवा तो निचेनी ई मेईल आई डी  पर  पण मोकलवा विनंती छे.
manugadhvibhadra@gmail.comcom

फोटा मोकलो तेमनी साथे गाम शहेर अथवा स्थळनुं नाम अवश्य लखवुं


                 वंदे सोनल मातरम्

चारणोनी सांस्कृक परंपरा. प्रस्तुति :- कवी श्री चकमक

चारणोनी सांस्कृतिक परंपरा...!

भारतीय संस्कृति अने देवी उपासनानुं जतन करवामां चारणोनुं विशिष्ट योगदान छे. आदिकाळथी चारणो शकितना उपासक रहया छे. चारण ज्ञातिनी आ विशिष्ट कुळपरंपराने लीघे नवलाख लोबडियाळीओऐ तेमने त्यां अवतार घारण कयोॅ छे. आ विशिष्ट मातृशकितनी परंपराने कारणे ज चारणोने देवीपुत्र कहेवामां आवे छे. देव ऐटले जेनामां दैवी संपत्तिना गुण होय ते देव. चारणो दैवी संपत्तिना गुणो घरावता हता.

सोनल आई कहेता के, '' पुजा सत्यनी होय, आदॅशनी होय, नीतिनी-दयानी होय, आपणां पूवॅज आईओ महान हता. पण चारणो आपणे आजे कयां छीऐ ? तेनो विचार करो. चारणो !
आपणुं ऐ सत घरमवाळुं जीवन कयां ? आपणी ऐ संस्कृति कयां ? ऐनो विचार करो. आपणे हजु अघ:पतनना मागेॅथी पाछा नथी वळ्या.

प्राचीन अने मघ्यकालीन युगमां उज्जवळ परंपरा घरावनार चारणोना आपणे वारसदारो छीऐ. परंतु मात्र अतीतनुं गौरवगान करवाथी के भव्य भूतकाळने वागोळ्या करवाथी आपणो उद्घार नहीं थाय.

आपणा ऐ वारसाने दीपाववो होय तो सत्य, सदाचार, संयम, शील, त्याग, तप, अने भकितना गुण जाळववा पडशे कारण चारणत्वनी आगवी ओळख प्रस्थापित करता गुणोनुं आचरण करनार व्यकित ज चारण कहेवाय.

जय माताजी.

प्रस्तुति कवि चकमक.

सोनलबीज आमंत्रण पत्रीका , अमरेली

મંગળવાર, 27 ડિસેમ્બર, 2016

आई सोनल आदेश :- रचियता :- कवि श्री मेघराजभा मुळुभा रतन (गढवी) गाम :- मढाद ,ता :- वढवाण , जील्लो :- सुरेन्द्रनगर

जय सोनबाइ मां
जय मां मोगल
आइ सोनल आदेश
सतवादी चारण बनो, काढो कुटुंब कलेश...
छोडो दारु चारणो, (इ) आइ सोनल आदेश...१
दाम माटे कोइ दीकरी, वेंचो नहीं लघुलेश...
दैत वृत्ती छोडीद्यो, (इ) आइ सोनल आदेश...२
चोरी जारी चुगली, काढो जुगार कलेश...
नीतिथी चारण नभो, (इ) आइ सोनल आदेश...३
कुरिवाजो काढवा, वरतो समय विशेष...
कारज भोजन भंग करो, (इ) आइ सोनल आदेश...४
मही पर छोडो मांगवु, वधो पुरुषार्थ वेश...
नेक टेक राखो नवड, (इ) आइ सोनल आदेश...५
जीवन एवुं जीवजो, अहिंशा बनो उदे्श...
वेद रामायण वांचजो, (इ) आइ सोनल आदेश...६
सरस्वती सेवो सदा, भक्ति करो भवेश...
उज्जवळ रीति आचरो, (इ) आइ सोनल आदेश...७
पढो सुविधा प्रेमथी, कायम समय संदेश...
देव जाती दिपावजो, (इ) सोनल आदेश...८
प्रतिभा तेज प्रतापथी, नमे महान नरेश...
एवा चारण अवतरो, (इ) आइ सोनल आदेश...९
धागा दोरा धुणवुं, काढो तुत कलेश...
चारण ! पाखंड छोडजो, (इ) आइ सोनल आदेश...१०
उज्जवळ करणी आचरो, व्रतधारी विशेष...
जगदंबा जीभे जपो, (इ) आइ सोनल आदेश...११
जीवन तपेश्वरी जीवजो, वर्ण चारण विशेष...
(तो) जगदंबा जनमशे, (इ) आइ सोनल आदेश...१२
तजो भोग आळश तजो, व्यसन चजो विशेष...
जीवन ऊंचुं जीवजो, (इ) आइ सोनल आदेश...१३
हरखो नहीं परहाणथी, परखो नहीं परद्वेश...
समद्रष्टि चारण बनो, (इ) आइ सोनल आदेश...१४
दोष अवर देखो नहीं, पेखो गुण प्रवेश...
शुभ द्रष्टि राखो सदा, (इ) आइ सोनल आदेश...१५
सुणो नहीं कदी श्रवण, परनिंदा परवेश...
काटो झटपट कपटने, (इ) आइ सोनल आदेश...१६
बोल एवा नव बोलजो, कडवा करे कलेश...
वाणी निर्मळ वापरो, (इ) आइ सोनल आदेश...१७
काबर, लाबर लूगडां, पहेरो नहीं पहेरवेश...
वरतो सदा वेशथी, (इ) आइ सोनल आदेश...१८
चारण चोथो वेद छे, दाखे उपमा देश...
माटे वेद पुराण जीभे वदो, (इ) आइ सोनल आदेश...१९
फोगट घरदार भटकतां, हटशे मान हंमेश...
माटे ध्यान राखो धंधातणुं, (इ) आदेश...२०
शरीर शुद्दी छे स्नानथी, भगती मन भवेश...
वित शुद्दी त्याग वधे, (इ) आइ सोनल आदेश...२१
बोल विचारी बोलवा, (जेथी) वधे तोल विशेष...
बोल कोल बदलो नहीं, (इ) आइ सोनल आदेश...२२
रहेणी कहेणी एक रंग, वाणी वर्तन वेश...
एक रंगा उज्जवळ बनो, (इ)
आइ सोनल आदेश...२३
धन पाछळ दोडो नहीं, लोभ भरी मन लेश...
हक नीतिथी हालजो, (इ) आइ सोनल आदेश...२४
सुख दुख छे संसार मां, विध विध रुपे वेश...
संतोषी सुखी बनो, (इ) आइ सोनल आइ...२५
देग तेग राखो दया, वाचकाछ विशेष....
जीवन तपधारी जीवो, (इ) सोनल आदेश...२६
भोग विलाशे भुवनमां, वधे रोग विशेष...
जीवनमां योग आचरो, (इ) आइ सोनल आदेश...२७
प्रणधारी पेंखता हरखे ह्रदय हंमेश...
(माटे) अटकी अडीखम रहो, (इ) आइ सोनल आदेश...२८
कंठ कहेणी ने काव्यना, हलके धोध हंमेश...
गाओ गीत गोविंदना, (इ) आइ सोनल आदेश...२९
काव्य कीर्ति मानव तणी, लखो नहीं लवलेश...
वदो न वाणी वैखरी, (इ) आइ सोनल आदेश...३०
अभ्यागत ने आसरो, हरखे दीपो हंमेश...
धरम आश्रय राखजो, (इ) आइ सोनल आदेश...३१
वखत प्रमाणे वरतजो, हिंमत राखी हंमेश...
करजो नहीं अवळा करज, (इ) आइ सोनल आदेश...३२
धंधो एवो धारजो, पाप न थाय प्रवेश...
नारायण नीति वशे, (इ) आइ सोनल आदेश...३३
दरिया रेले दुखडा, (भले) खडेडे आभ खगेश...
(पण) अणडग चारण नो डगे, (इ) आइ सोनल आदेश...३४
कुशळ परहित काजमां, पुण्ये पंथ प्रवेश...
दुनियाने नव दुखवो, (इ) आइ सोनल आदेश...३५
शक्ति धन बळ सांपडे, वधे सुख विशेष...
(तोय) चारण कोइदी नो छके, (इ) आइ सोनल आदेश...३६
मन मोटा तन उजळा, डारण पडछंद देह...
समदर पेटा चारणो, (इ) आइ सोनल आदेश...३७
चतुराइ चारण ने वरे, डापण वंदे देश...
मटाडे कजीया मलकना, (इ) आइ सोनल आदेश...३८
प्रगट वेद पुराणमां, वेदशास्त्र विशेष...
चारण देव समान छे, (इ) आइ सोनल आदेश...३९
पख मोशाळे शेष पत, मुंणा पिता महेश...
चारण देवीपुत्र छे, (इ) आइ सोनल आदेश...४०
व्याप्यो कळीयुग विश्वमां, समय कहंत संदेश...
चारण ! कसोटी चेतजो, (इ) सोनल आदेश...४१
धर्म टके तो धन टके, वधे वंश विशेष...
सुख रहे संसारमा, (इ) आइ सोनल आदेश...४२
जीवन दैवि जीवजो, अवर लिए उपदेश...
कळीयुगी जीवन काढजो, (इ) सोनल आदेश...४३
तमो गुण अग्न्यान थी, वधे गर्व विशेष...
(माटे) हुं पद थी पाछा हटो, (इ) आइ सोनल आदेश...४४
सुर दुर्लभ संसारमा वदीये मानव वेश...
पारसरुपी पेखजो, (इ) आइ सोनल आदेश...४५
अडसठ तिरथ अांगणे, वंद मावतर वेश...
पाळो आग्ना प्रेमथी, (इ) आइ सोनल आदेश...४६
दानव मानव देहने,हरपाळ मोत हंमेश...
मुक्ति जीवन मेळवो, (इ) आइ सोनल आदेश...४७
सर्जक शोषक सृष्टिनी, पालकरुप प्रमेश...
तुं शक्ति कारण करण, आइ सोनल आदेश...४८
वर्ष एकावन विश्वमां, समर्प्या अमर संदेश...
स्वधाम सोनल संचर्या, आइ सोनल आदेश...४९
शीखे वांचे अने सांभळे, आइ सोनल आदेश...
बेशक जीवन धन्य बने, आइ सोनल आदेश...५०
सोनल मुखे सांभळ्या, (जे) एकावन आदेश...
कवि 'मेघराजे' कथ्या, आइ सोनल आदेश...५१
रचियता :-
 कवि श्री मेघराजभा मुळुभा रतन (गढवी) गाम :- मढाद ,ता :- वढवाण , जील्लो :- सुरेन्द्रनगर
टाइपिंग --- राम बी गढवी
नविनाळ कच्छ
फोन नं. -- 7383523606
{भुलचुक सुधारी ने वांचवी}
जय हो आइ सोनबाइ

आई श्री सोनल मां चरज : रचना :- दिलजीतभाई गढवी

आई श्री सोनल मां मढडा
         "चरज"
राग..बदलाय बहू गयो छू...

संकट मटीग्या सामटा आई मां आव्या पछी,
विघनो विखाणां वेगथी आई मां आव्या पछी,....टेक

हती अंधारी रात मां सघळा चारण वरण परे,
तिमीर टळीग्या ते बधा आई मां आव्या पछी,....1

चिंता मटाडी मावडी तमे स्नेहे छोरुडां तणी,
वेम  व्यसन ने कर्या अळगा आई मां आव्या पछी,....2

नानू नोधारु नावडूं तोफानी दरियो छे घणो,
कृपाळू कांठे लाविया आई मां आव्या पछी,....3

अभण हता तेथी ज तो आवडत ओछी हती,
भणतर भणाव्या भावथी आई मां आव्या पछी,.....4

दूनिया तणी आ भीडमां कोण कोने ओळखे,?
ओळखाण ज्ञाती नी दिव्य *दिलजीत* आई मां आव्या पछी,.....5

*बीजोत्सव निमीते*
आई मां सोनल वंदना

दिलजीत बाटी ढसा जं.

मो...99252 63039

कवि श्री कागबापुना नानपणनी केटलीक वातो : प्रस्तुति कवि श्री चकमक

कवि कागबापुना नानपणनी केटलीक वातो...!

कागबापुनी आसपासना वातावरणमां आहीर, खसिया, बाबरिया, गरासिया ऐ कोममां ऐ वखते दारु पीवामां-पावामां, ऐवी ऐवी मिजलसो करवामां, पोतानाथी बीजा माणसो थरथरे ऐवुं वतॅन राखवामां गौरव मनातुं.

हुं गुजराती पांच चोपडी भणेलो, ऐटले रामायण वांचतो, गायो चारतो, कुवामांथी पाणी सिंची गायो पातो, मने आ कामनी फरज पाडवामां नहोती आवी, आ तो मारो शोख हतो.

मारा पिताश्री आ बाबतथी नाराज हता केमके तेओ वटदार माणस, पोतानी शेह बीजा माणसो पर पडे ऐवुं ऐमनुं वतॅन हतुं. कयारेक तेओ कहेता पण खरा के '' मारुं आवडुं मोटुं कमठाण, ऐनुं शुं थाशे ? आ तो छते दीकरे सीताराम ! ''

ऐमने ऐक उपाय सूझयो के, दीकराने दारु-मांस खवडावुं तो आ बघुं छोडी दे ! पण मने दारु पीवानुं कहे कोण ?

महुवा पासे मालण नदीने कांठे सांगणीया गामना हीपा मोभ साथे अमारे त्रण पेढीनो सबंघ.
मारा पिताश्रीऐ तेमनी साथे मने दारु पावा विषे बघी वात नक्की करी.

मजादर आ बाबते आवेल हीपा मोभ अने हुं अमारा खेतरमां बेठेला त्यारे तेमणे मने दारु पावा आग्रह करेलो. त्यारे में ऐमने ऐटलुं ज कहयुं के, '' भला माणस तमारे ने अमारे त्रण पेढीनो सबंघ छे अने तमारा मोढामांथी ऐक बाळक जेवा माणसने दारु पावाना शब्दो नीकळे, ऐ सारी वात न कहेवाय.
स्नेही तो ते ज कहेवाय के जे खराब रस्तेथी सारा रस्ते लई जाय. तमे आहिर थई मने चारणने दारु पावा उभा थया ते तमने शोभतुं नथी. ''

मारा आवा वेणनी ऊंडी असर थई. मारा पिताने ऐमणे कहयुं के, '' आ चामडुं आळुं नथी, रंगाई गयुं छे माटे आ पंथे चडवा कहेवुं व्यथॅ छे, पाप छे. '

जय माताजी.

प्रस्तुति कवि चकमक.

सोनलबीज आमंत्रण पत्रीका, काळेला

सोनलबीज आमंत्रण पत्रीका , जामनगर

सोनलबीज आमंत्रण पत्रीका , ववार , कच्छ

सोनलबीज आमंत्रण पत्रीका , चेन्नई

सोनलबीज आमंत्रण पत्रीका , जोटाणा

अणमोल हा हा अमतणा मां दिवस क्यां जाता रह्या : रचना :- दुला भाया काग , भगतबापु

आवो आजे एक कागबापुनी रचना माणीये

(छंद :-  सारसी)

जिण पेट धारी दिव्य काया जोगमाया जनमती.
दमती सकण परिताप अे पग जगत सौ नमती हती .
खमकार करती खोडलीना पथर गुण गाता रह्या,
अणमोल हा हा अम तणा अे दिवस क्यां जाता रह्या ???

उजणा वाणी सधु बापल बुट बलाड बेचरा,
चोराड कुणमां देव चांपल कान सावज कर धरा ,
सुणी साद आवड मातना रवीराज पण थंभी गया ,
अणमोल हा हा अम तणा अे दिवस क्यां जाता रह्या ???

नव लाख दण लई चड्यो नवघण प्रबण पोषीया,
वरमंड ओदर धार वरवड सात सायर शोषिया ,
कणमां ज जणमा पाड केडा लोढ दण समजी गया.,
अणमोल हा हा अम तणा अे दिवस क्यां जाता रह्या ???

जगदंब चारण जीवणी पर जार मनसुबो हतो ,..
थइी सिंहण बाकर शेखने सरधारमां चीर्यो हतो,..
उंधो पछाडी पीर थाप्यो अरण परचा आपीया,,.
अणमोल हा हा अम तणा अे दिवस क्यां जाता रह्या ???

चोरीअे चडियेल मात सोनल कोडीअे रमती हती ,
वरमाण फेंकी वेगणी गैपाणने भजती हती ,,....
जग जाण तोडी जोगणी ब्रह्नचारणी व्रत पाणीयां ...
अणमोल हा हा अम तणा अे दिवस क्यां जाता रह्या ???

अा समय वसमो अम परे सौ आध चंडी आवजो ..,
जिण पेट जन्मे सुध्ध चारण वखत अे वरतावजो ,,..
सत    '' काग '' आदि चारण्यु कणियुगमां वसियुं किया ?
अणमोल हा हा अम तणा अे दिवस क्यां जाता रह्या ???

( दुहो )
देव जातीमां दिपती, जगदंबा घर जोय ;
कहां गये कलीयुगमें , चारण के दिन सोय ?

रचयता :- दुला भाया काग ( भगतबापु )

टाईप :-  मनुदान गढवी

नवा वर्षे नवा संकल्प

नवा वषेॅ नवा संकल्प....!

जीवनना मागॅमांथी कदी भटकी न जईऐ,
मंझिल मेळववा हंमेशा साची सफर करता रहीऐ.

जीवीऐ ऐवुं के कोईने थोडा काम आवीऐ,
अावो नवा वषेॅ थोडा शुभ संकल्प करता जईऐ.

अंग्रेजी केलेन्डर प्रमाणे नवुं वषॅ होय के हिन्दु केलेन्डर प्रमाणे नवुं वषॅ होय पण प्रत्येक वषेॅ संकल्पनुं महिमागान करवामां आवे छे.
संकल्पने आटलुं महत्व ऐटला माटे आपवामां आवे छे के ऐकलव्य जेवा पुराणकाळना पात्रो होय के प्रखर राजनेता टिळक होय बघा ऐकसुरे कहे छे के दढ संकल्प वगर सिद्घी प्राप्त थती नथी.
ऐकलव्ये गुरु द्रोण नहीं तो तेमनी मूतिॅ पासेथी घनुष्यविघा प्राप्त करवानो दढ संकल्प कयोॅ हतो.
हेलन केलर दोढ वरसना हता त्यारे तेमनी बंने आंखो चाली गई हती पण तेमणे विकट परिस्थिति सामे लडी लेवानो दढ संकल्प कयोॅ अने तेओ जीवनमां सफळताने वयाॅ.

जिंदगीने मठारवा माटे संकल्प लेवो ऐ सदगुण छे अने ऐनुं आगवुं महत्व छे.

अमारो चारण समाज पण नवा वषेॅ केटलाक महत्वना संकल्प लेशे.

* जुना रुढिगत कुरिवाजो
   मांथी निकळवानो,
* समाजमांथी जुदा जुदा वाडा
   दूर करी, हुं फकत चारण छुं
   ऐवो माहोल उभो करवानो,
* दाणा जोवा, दोराघागा
   करवा, के घुणवाना घतिंग
   बंघ करवानो,
* दारु-मांस अने कन्याविक्रय
   जेवा दूषणो दूर करवानो,
* पहेला धरोधर जोगमाया
   जन्मती ऐवा उजळा
   माणसाईना संस्कार प्राप्त
   करवानो,
कवि चकमकने अंत:करणथी आशा छे के आ बघी बाबतोना दढ संकल्प चारणो नवा वषेॅ लेशे.

जय माताजी.

प्रस्तुति कवि चकमक.

कणेरी धाम खाते आई श्री सोनल मां दिव्य चेतना मंदिर नो प्राणप्रतिष्ठा महोत्सव उजवाशे

कणेरी धाम खाते आई श्री सोनल मां दिव्य चेतना मंदिर नो प्राणप्रतिष्ठा महोत्सव उजवाशे

श्री आदिपुर चारण - गढवी समाज जोग


श्री आदिपुर गढवी (चारण) समाज जोग

   *।। खीज जेनी खटके नही, रुदिये मीठी रीज*
*एवी मढडावाडी मातनी, आवी सोनल बीज ।।*

     *ll जय हो चारणत्व ll*

*जय माताजी* 
चारण समाज सुधारक अने उज्जवल भविष्य आपनार *प.पु.आइ सोनल मा* ना *93* प्रागट्य पर्व *(सोनल बीज)* निमीते *श्री आदिपुर गढवी (चारण) समाज* द्वारा एक पहेल
     ता.31/12/2016 ने शनिवार ना रोज *चारणी नुतन वर्ष* एटले के *सोनल बीज* ना सवारे ०८:०० वागे शोभायात्रा (रवाडी) मा चारणी पेरवेश (चेणी आभो) अने रुमाल रुमाल न होय  तो काडी कामडी पहेरवा नम्र अपील अने ते दिवसे अखंड व्यशन मुक्त रहेवु एवी चारणो पासे नम्र अपेक्षा.
           
     🏻        *लि*      

*श्री शिवराजभाइ डी गढवी*
*(प्रमुख श्री आदिपुर गढवी समाज)*
   
🏻 *ll वंदे सोनल मातरम् ll*

રવિવાર, 25 ડિસેમ્બર, 2016

सोनलबीज आमंत्रण पत्रीका , झरपरा , कच्छ

सोनलबीज आमंत्रण पत्रीका , आई श्री खोडीयार नगर , राजकोट

सोनलबीज आमंत्रण पत्रीका, गांधीधाम , कच्छ

डॉ.शंकरदान जी द्वारा पालनपुरमां मेडिकल केम्प

*मेडीकल केम्प*

    *वहेला ऐ पहेला*

    *दि.8-01-2017 को स्नेहमिलन समारोह के दिन  पालनपुर मे  आई श्री सोनल युवक मंडल बनासकांठा द्वारा आयोजित फ्री आयुर्वेदिक केम्प  डॉ शंकरदान सा सिंहढायच देशनोक द्वारा कृष्णा मोहन छात्रावास परिसर पालनपुर में ही स्वजातीय बन्धुओ का घुटने का दर्द/बांझपन/लकवा , मधुमेह, कमरदर्द, पुराना बुखार, ऐलर्जी अन्य रोगों का सफल इलाज निशुल्क नाड़ी देखकर किया जावेगा*
*यदी कोइ लाभ लेना चाहते हे तो आपना नाम नीचे दीये गये फोन नंबर पर लिखवा कर अपना टोकन  नंबर प्राप्त करलेवे*

7567890058 जीतेन्द्रसिंह

9426704475 जे.डी.गढवी

9428681926 प्रविणदान

   इस सामाजिक महत्ती कार्यो हेतु सगत लूंग माँ ट्रष्ट वलदरा राजस्थान से भी आप अधीक जानकारी प्राप्त कर सकते है
नरपतसिंह आसिया वलदरा
08003993029
डूंगरसिंह आसिया
09982107507

सोनलबीज आमंत्रण पत्रीका, बोपल . अमदावाद

सोनलबीज आमंत्रण पत्रीका, आईश्री खोडीयार नगर राजकोट

सोनलबीज आमंत्रण पत्रीका, राजकोट संत कबीर चोक

सोनलबीज आमंत्रण पत्रीका, माणकाधार ता, केशोद

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