ચારણત્વ

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સોમવાર, 12 ડિસેમ્બર, 2016

आई श्री मोगल वंदना : रचना :- दिलजीतभाई गढवी

🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹
✍🏾
*आई श्री मोगल वंदना*

           *प्रभाती*
राग..मे कानूडा तोरी गोवालण..

ओखा वाळी आई अणाणी मोगल मां मच्छराळी रे,
भीमराणा ना नेहमां भाळी अंबा नी अवतारी रे,
ओखा वाळी आई......टेक..

पग पाताळे आभथी उंची, वैराट रुप वरताणी रे,
भाल तिलक ना कंकू कण मां,
दूनिया आखी देखाणी रे,
ओखा वाळी आई. ...1

शिव ब्रह्मा हरी नारद शारद, जाप जपे जोराळी रे,
गरवा सादे चरजू गावे, रमा उमा ब्रह्माणी रे,
ओखा वाळी आई.....2

ठाकर मां नो चाकर थई ने, धेनू चरावे धजाळी रे,
वाछरु तमाणा वननो राजा, पहर चारे परचाळी रे,
ओखा वाळी आई.....3

चारण तारण अधम उधारण,शकित तूं सूखकारी रे,
उदो उदो भणे *दिलजीत* बाटी, खम्मां करो खमकारी रे ओखा वाळी आई.......4

आई श्री मोगल वंदना

दिलजीत बाटी ढसा जं.

*मो..99252 63039

રવિવાર, 11 ડિસેમ્બર, 2016

कविश्री दुलाभाया काग रचित दुहा ओ

*** दुहा ***

उपर उजळीयो थीओ, मछनां पेट मसाण;
ऐथी सारो जग सुजाण, काळा रंगनो 'कागडो'....

मन मेलां तन उजळां, ऐवी भात अनेक;
धन्य काळुडा 'काग'ने, बहार भीतर ऐक...

ईडां जो अवरां तणां, तारे माळेय मुकी धे;
ऐने सोड्ये साचवजे, के'वाय थापण 'कागडा'...

माळे मेलीने गियां, चाहे ज छेतरवा;
ऐनुं वेर ज वाळीश ना, कूणां सामुं 'कागडा'...

बचलां थाशे बोलशे, ऐमांय आतम छे.
ऐने सोड्ये सेवी दे, भले कोयल ईडां 'कागडा'!...

भाळे आंखडीये भुवण, प्रेम सौ पंखीना;
तारो भोग जे भाळे ना, कदीऐ मानव 'कागडा'...

तन काळो मन उजळो, चतुर चांचाळो;
भणतां नव भाल्यो, कुळनुं डा'पण 'कागडा'!....

छेतरवा चाहे धणा, चतुर ना सपडाय;
जुठां ने जाणी जाय, कामणवाळो 'कागडो'....

भोजन मीठुं भाळतां, दगो दरशावे;
सौने समजावे, कळकळ बोलीने 'कागडो'...

कळ कळ बोले 'कागडो', स्वादे चडशो ना;
जमवा जशो ना, पंखीयो ! ऐमां पाशलो...

कुडा साचा कोकना, धाट ज धडीये ना;
चतुर चडीये ना, कोईने वादे कागडा...

- चारण कवि श्री दुला भाया काग (भगतबापु).

जय मां सोनल
आपनो दिवस शुभ रहे......

बेटी बचावो : रचना :- दिलजीतभाई गढवी

✍🏾
*बेटी बचावो*
          " दूहो "
बेटी आरोग्य बाप नूं वळी मीठो महेरामण,
ओछू बोले अदब घणी आवी स्नेहाळी समजण,

        *छंद भूजंगी*

दिकरी छे दरियो मेरामण मीठो,
जीवनमां स्वार्थ कदि नव दिठो,
पवितर नातो पिताश्री निभावो बचावो बेटी ने बचावो बचावो...1

नित काम काजे घरोघर जाती
गरीबी तणां तोय गीतो न गाती,
एवी धीडी तणो केम आव्यो अभावो,
बचावो बेटी ने बचावो बचावो....2

प्रभाते उठी काम काजे वळगती,
रंगोळी बनी फळियामां महेकती,
स्वच्छ शेरी चोक्खू आंगण सजावो,
बचावो बेटी ने बचावो बचावो,.....3

नारी थई नारी ने कां ?कूंखमा हणो छो,
सशकित करणनी तोय वातू करो छो,?
जन्मता पेला केम मृत्यू अपावो,?
बचावो बेटी ने बचावो बचावो....4

करी भृण हत्या ने पापी ठरो छो,?
अनामत नी तोय निती घडो छो,?
मूख मां राम छूरी बगलमां छूपावो,?
बचावो बेटी ने बचावो बचावो....5

मळ्यो देह मानव तणो आ मजानो,
एमा दिकरी छे खूशीनो खजानो,
हैया ना गरथ ने कां हाथे गूमावो,?
बचावो बेटी ने बचावो बचावो.....6

नथी स्वार्थनी कोय जूठी सगाई                        अती स्नेहनी छे आ उंची उंचाई,
शा ने छोड उग्या पेला उथलावो,?
बचावो बेटी ने बचावो बचावो....7

भणेली गणेली त्रणे कूळ तारे,
गणत्री करे ना कदी कोई काळे,
सम द्रष्टी सहू परे सम भावो,
बचावो बेटी ने बचावो बचावो. ...8

उपासक शकितना मां ने भजो छो,?
छता विण कारण तनूजा तजो छो,?
कहो केम स्हेशे प्रभू अन्याय आवो,?
बचावो बेटी ने बचावो बचावो.....9

भीनी आंख भाळीने बेटी पूछे छे,
अवस्थामां आवीने आंसू लूछे छे,
*दिलजीत* थोडी दया दिल लावो,
बचावो बेटी ने बचावो बचावो....10

          *दूहो*
फेर राखे जे फरजंदमां ई पापी थी ए पतीत,
छोरुने जे सरखा गणे एनू दिव्य जीवन *दिलजीत*
              "
बेटी बचावो  फरज बजावो

दिलजीत बाटी ढसा जं.

*मो...99252 63039

શનિવાર, 10 ડિસેમ્બર, 2016

आई श्री सोनलमां प्रभाती : रचना :- दिलजीतभाई गढवी

✍🏾     

          *प्रभाती*
*आई श्री सोनल माँ मढडा*

राग..तूं तारे मन साचू मान..

मढडा वाळी आई अमाणी मन माग्या फळ आपती,(2)
मढठा वाळी आई....टेक..

भजन भाळी भावनू माडी वेगथी वारे आवती,
दूःख दाळीदर दोयला टाळी बाळक ने बचावती,
मढडा वाळी आई.....1

अंतर नादे याद करो त्यां एकज सादे आवती,
संकट माथी सौ सेवक ने चंडीका छोडावती,
मढडा वाळी आई.....2

उजळा मोढे ओरडा आपी नित नेह वरहावती,
वाडी वजीफा चडवा घोडी लाड छोरु ने लडावती,
मढडा वाळी आई......3

कोठिये कायम कण दयेने अखूट संपत आपती,
नित प्रभाते नाम जपे एना कृपाळू कष्टो कापती,
मढडा वाळी आई....4

दूध दहीं ना दिये दूजाणा मेखडियू मन भावती,
अष्ट सिध्धी अने नवे निध्धी ने नेहडां मां नचावती... .5

सूरज *सोनल* नाम नो उग्यो  अवनी ने उजाळती,
*दिलजीत बाटी* दिल थी भजू, तिमीर बधा टाळती,
मढडा वाळी आई......6

आई श्री सोनल मां मढडा नी वंदना.

दिलजीत बाटी ढसा जं.

*मो..99252 63039

सुर्य वंदना

कासब नंदण कापजो, आवे पिड जो अंग
जळ दोहो दई जोगडो, रांण नमां लख रंग

हे कास्यप पुत्र भगवान सुरज नारायण अमारी कोई अंग पीडायुं आवती होय तो तेने दुर करज्यो , आप तो लाखो रंग धरनार छो, (अहीं बपोरे त्रण वागे पिळा रंग धारी देखाता सुरज नारायण आपडा थी चार कलाक ना फेर वाळा देस मां उदय थता लाल रंग मां दर्शन आपता होय छे, आम एकज नारायण अलग स्थळे अने अलग लोको ने अनेक रंगो मां देखाय छे, मांणसे मांणसे पण अलग भाव रंग ना दर्शन आपता होई लख रंगा कह्या छे)हुं आपने दोहा रुपी जळ चडावी नित्य वंदन करुं छुं
🌅🌞☀🙏🏼☀🌞🌅

आई सोनल प्रार्थना

वदीयें एक ज वार, धर डगे न ध्रूजियें।
(मारी) वाणी नो वेवार, साचो राखजे सोनबाइ।

( है आइ सोनबाइ! मैं आप से प्रार्थना करता हुं की मैं जो भी बात एक बार बोल दुं, फिर धरती पलट जाने पर उससे मेरा मन चलित न हो।  है मां, मेरे इस वाणी रूप व्यवहार को आप हमेशा सत्य रखना)

-कवि: *जय*।
- जयेशदान गढवी।

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