ચારણત્વ

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રવિવાર, 18 સપ્ટેમ્બર, 2016

मां सोनल वंदनां : रचना :- दिलजीतभाई गढवी

*पूज्य मां सोनल वंदना*
राग.उचीरे चडूने नीचे उतरु..
      ॥मणियारो॥
आईमां ए पधार्या आजे आंगणे,
अंतर उडेरे आनंद केरी छोळ,
भव भय हारणी रे हो विघन विडारणी,
आवी सोनल मां प्रेमेथी लागू पाय...टेक

काळोरे ए शोभेछे आयल भेळियो,
अंबीका आंखडिये अमृत केरी
धार,
अधम उधारणी रे हो पतीत पावनी,
आवी सोनल मां प्रेमेथी लागू पाय...1

वदेछे ए मूखेथी वाणी वेदनीरे
मधूरा बोलेरे माताजी मिठा बोल,
आदेश उचारणी रे हो बूढी ब्रह्मचारणी रे,
सोनल मां प्रेमेथी लागू पाय.2

नातोरे ए जाणीने जूना जूगनो,
आव्या छोरुनी लेवाने संभाळ,
मायाळू मावडी रे हो बाई झालो बावडी रे,
सोनल मां प्रेमेथी लागू पाय.3

अरज ए गूजारे *दिलजीत* आटली,
वडहथ वेलेरी करजो रे मारी वार,
अंबा अवतारी रे हो मढडा वाळी,
सोनल मां पूरेमेथी लागू पाय.4

     *आई सोनल वंदना*
नितीन देवका ना कंठे अशोक
साउन्ड *धींगी धजायू* भाग
*"2"* मा गवायू छे

*दिलजीत* *बाटी* ना
*जै मां सोनल* *ढसा जं.*
*मो.9925263039*

શનિવાર, 17 સપ્ટેમ્બર, 2016

मां सोनल चालीशा : रचना :- दिलजीतभाई गढवी

*मां सोनल चालीशा*

        *दूहो*
प्रभाते प्रथम वांचिये सोनल चालीशा,
आई पूरे आशा मढडा वाळी
मावडी,
          *छंद*
जै सोनलमां  जै  माताजी
आद्यशकित  के  अंबाजी
जन्म्या चारण कूळ जोराळी
जै जै जै मां मढडा वाळी..1

कफरा आ कळी काळे आव्या
स्नेह छौरुडा पर लाव्या
हानी  हरवा ने  हेताळी
जै जै जै मां मढडा वाळी...2

अज्ञान ने मां अळगा कीधा
अक्षरना रुडा ज्ञान तें दिधा
भणाव्या छोरुने  भूजाळी
जै जै जै मां मढडा वाळी...3

गंगा  जेवू  पवित्र   झरणूं
सूख आपेछे  मांनू  शरणूं
दळणू करीने दूःख दळनारी
जै जै जै मां मढडा वाळी...4

व्रण माथे हती रात अंधारी
एमा ज्ञाती जो  अटवाणी
प्रगटी ई  वखते  परचाळी
जै जै जै मां मढडा वाळी...5

कू-रिवाजो  कोरे  करवा
आव्य आई आपदा हरवा
धींगी धरामा धाम धजाळी
जै जै जै मां मढडा वाळी...6

चारण धारण शब्द सूणायो
वरण आखा  ए    वधाव्यो
हस्ते मूखे  दई  हरीयाळी
जै जै जै मां मढडा वाळी...7

पापीना ज्यां पाप हटे छे
माना शरणे रोग मटे छे
धन्वंतरी मां देवी दयाळी
जै जै जै मां मढडा वाळी...8

शरणे तारे सूखनो  दरियो
अखूट खजानो आंगण भरियो
खूटे नहि खर्चे खपराळी
जै जै जै मां मढडा वाळी...9

सत्त चूकेला चिले चाल्या
बावडूं झाली पाछा वाळ्या
डारो दिलथी दईने दयाळी
जै जै जै मां मढडा वाळी..10

संकट वखते राह  बतावे
आधी व्याधी ने अळसावे
उपाधी अळगी करनारी
जै जै जै मां मढडा वाळी..11

चंडी साची सूखनी राशी
आई अमाणी छो अविनाशी
मढडा निवासी मांने भाळी
जै जै जै मां मढडा वाळी..12

जळहळ ज्योती मढडे जागी
लग्नी मांना शरणे लागी
हमीर दूलारी मां हेताळी
जै जै जै मां मढडा वाळी..13

मूर्ति मां नी मंगल कारी  अ'मंगळ अळगा करनारी
ओपे माथे कामळी काळी
जै जै जै मां मढडा वाळी..14

अन्नपूर्णा छे आई अमारी
विघन नाख्या बधा विडारी
तारवा आवी मां तत्काळी
जै जै जै मां मढडा वाळी..15

भव सागरमां भूला पडेला
चित जेना चकडोळ चडेला
चारण छोरु लिधा संभाळी
जै जै जै मां मढडा वाळी..16

चारण धारण एक थवानी
भेद मटाड्या बधा भवानी
तिमीर सघळा दिधा टाळी
जै जै जै मां मढडा वाळी..17

बावडूं थोभी बाई बचावो
मारग साचो मात बतावो
स्नेहथी लेजो मने संभाळी
जै जै जै मां मढडा वाळी..18

जगमां शकित जीत अपावे
जिभेथी  जगदिश  जपावे
वरुडी स्रुपा वडहथ वाळी
जै जै जै मां मढडा वाळी..19

स्नेह सरुपी समता तूछो
मात अमारी ममता तूछो
जीवन दिधू आई उजाळी
जै जै जै मां मढडा वाळी..20

आफत आवे जो अणधारी
वेगे देजो  मात  विदारी
वारु करजो वालप वाळी
जै जै जै मां मढडा वाळी..21

संकट वखते साद करुछू
धाबळियाळी ध्यान धरुछू
कांठे करजो आई कृपाळी
जै जै जै मां मढडा वाळी..22

जहांज जूनूने जळछे जाजू
लोबडीयाळी राखो लाजू
नेखमें लावो नाव नेजाळी
जै जै जै मां मढडा वाळी..23

काळी अंधारी कांईन सूजे
मेघली राते थरं थर धृजे
व्हाण तारी ल्यो विगतवाळी
जै जै जै मां मढडा वाळी..24

तोफानी दरियेथी  तारो
निजाश्रीतने आई उगारो
भै हरी ल्यो भेळियावाळी
जै जै जै मां मढडा वाळी..25

नजरे राखो नाव अमारु
बळवंत लावो हेते बारु
तारील्योने त्रिशूळवाळी
जै जै जै मां मढडा वाळी..26

साचे गळगळो साद थयोछे
अंतरथी आराध  थयोछे
बाळ बचावो मां बिरदाळी
जै जै जै मां मढडा वाळी..27

देश सोरठने  तमे  दिपाव्यो लाव अनोखो अमने अपाव्यो
आई राणलनी कूंख उजाळी
जै जै जै मां मढडा वाळी..28

मारु तूंबेल अने परजियो
अगरवसोने वळी सोरठियो
भेद भूसाणा बधा भूजाळी
जै जै जै मां मढडा वाळी..29

सघळी शांती मातु शरणमा
आई अमारी वडी वरणमा
हमीर धीडी हरख वाळी
जै जै जै मां मढडा वाळी..30

शिष आकाशे पग पाताळे
भूवन त्रणै  नजरे   भाळे
आभ अटारिये आसनवाळी
जै जै जै मां मढडा वाळी..31

हरीहरना ज्यां साद पडे छे
जमनारा ज्यां भोळा जडे छे
ठहक थी मां पिरसे थाळी
जै जै जै मां मढडा वाळी.32

आई अंधाराने अळसावो
लाड छोरुने खूब लडावो
तूं दयाथी ज्ञाति तेजाळी
जै जै जै मां मढडा वाळी..33

अंतर थी जे याद करे छे
तेने सहाई तरत मळे छे
पूगे वारे  मां  पगपाळी
जै जै जै मां मढडा वाळी..34

वरसे तूं वरसाद सरुपे
मां  देखाणी दिपे  धूपे
थडां मंदिरे थानक वाळी
जै जै जै मां मढडा वाळी..35

शकित सांभळ साद अमोरो
सारो नठारो छू बाळ तारो
गूना जोशोना मां गूणवाळी
जै जै जै मां मढडा वाळी..36

व्याधीने विखवाद हरील्यो
दर्द देहना दूर करी  दयो
दवा मटाडो  हवे  दयाळी
जै जै जै मां मढडा वाळी..37

नाभी कमळनो नाद थयो छे
वालपनो वरसाल अंयो छे
विजा रुपे  मां  वरताणी
जै जै जै मां मढडा वाळी..38

विरडो वालप वाळो मां छे
मां दया थी खम्मा खम्माछे
क्षमा धरो ने मां सतवाळी
जै जै जै मां मढडा वाळी..39

चरणे मांना शिष नमावू
स्नेहे चालीशा संभळावू
बाटी दिलजीत बाळ दयाळी
जै जै जै मां मढडा वाळी..40
           *दूहो*
चालीशा नो स्नेहथी जे करशे कायम पाठ,
आई सोनल आपशे ठाकर वाळो ठाठ;       1

भजन भाळी भावनू आई आवे अविलंब,
मढडा वाळी मावडी जै सोनल जगदंब,   2

सवार सांज संभारशे जे अंतर
धरी उमंग,
आई सोनल आपशे राज समो  नित रंग,      3

*मां सोनल चालीशा*
एटले मां सोनल नू महीमा
गान आई सोनल मां चारण समाज माटे मोटां मां मोटूं
श्रध्धा नू केन्द्र एटले मां नू मढडा अने आई सोनल आजे जे आपणा समाज नी भव्यता
देखाय छे ई मात्र ने मात्र जो
कोई नो प्रताप हाय तो ई आपणी आई सोनल नो
प्रताप कहेवामा जराय अतिश्योकित नही कहेवाय
माटे माना गूणगान गावा माटे
चालीशा लखाणी छे नही के
विद्वता बताववा माटे हूं ठामूको विद्वान नथी कोई पण जात नू जाजू भणतर नथी
छता मां उपर नी श्रध्धा आखा समाज ने सविशेष होय छे तेथी भूल होय तो भूल साथे स्वीकारशो एवी आशा साथे *दिलजीत बाटी*
ना *जै सोनल*
*मो.9925263039*

स्व.श्री बापलभाई गढवी चोकनुं नामाभिधान

भगतबापु रचित सुवाक्यो

जय माताजी

आजना सुवाक्यो

*31. दुनियानी सौ अजायबीओमां मोटी अजायबी अे छे के , मरण चोक्कस छे, छतां जीवननिर्वाहनी प्रवृत्ति उपरांत पण मानवी केटलीक अंधाधूंधी करी बेसे छे.*

*32. रोग , वृद्दत्व , अने मरण ईच्छा विना आवे छे.*

*33. शास्त्रो जे आज्ञा करी गयां छे . तेना पालन करतां जेनी ना कही गयां छे.ते करवा तरफ मनुष्यनी वधारे प्रवृत्ति छे.*

*34. महापुरुषना आदेश पर बुद्धिनां चोगठां बनावीने मनुष्ये पोताने मनमानतो व्यवहार कर्यो छे.*

*35. गूमडाने रुझ तो अंदरथी आवे छे. बहारनो उपचार तेने वधवा देतो नथी.*

*36. नाना झाडने थोडो वखत वाड करीने रक्षण करवुं जोईअे मोटुं थया पछी अेने ढोर वगेरे उखेडी शक्तां नथी.*

*37. सुखी मानवीओना स्मशाननुं नाम शहेर छे.*

*38.बुद्धि अेक नवी वस्तुनी शोध करीने सो उपाधिओने जन्म आपे छे.*

*39. ईश्वरने न मानवा करतां मानवाथी फायदो छे , न मानवी वीतावेला अवतारने अंते पस्तावानो पार रहेतो नथी.*

*40. उत्तम क्षुधा निर्विघन निंदा, अंग महेनत अने ग्रामनिवास अे महापुण्यनां फळ छे.*

*रचियता :- भगतबापु , कागवाणी भाग - 5*

શુક્રવાર, 16 સપ્ટેમ્બર, 2016

धन्य धरां सौराष्ट्र : रचना :- दिलजीतभाई गढवी

॥ *धन्य धरां सौराष्ट्र*॥

         *दूहो*
धींगी धरा सौराष्ट्रनी धींगा धर्म ना धाम,
धींगा माडूं धीरज घणी नरवा कर्मी नाम;

         *छंद*
द्वादर्श ज्योती लींग मां जेनी
प्रथम पूजा थाय छे,
धरणी अमारी पवितर पूराणे  पंकाय छे,
द्वारकानो धणी अमाणो सबळ
चोकी दार छे
धन्य धन्य धरा सौराष्ट्र नी वंदन हजारु वार छे...1

सिध्ध चोरासी अने ज्या बूढी ना छे बेहणां,
नवनाथ ना रुडा नेखमो ने तेजपूंजो ते तणां,
जूग जूनो तोय नवो गरवो आ गीरनार छे,
धन्य धन्य धरा सौराष्ट्र नी वंदन हजारु वार छे...2

सरभंग वाळा समय थी ज्यां
परब बांधी प्रेमनी,
हेते धरे जो हाथ माथे करे काया हेमनी,
करे सेवा पतियानी देवीदास नो दरबार छे,
धन्य धन्य धरा सौराष्ट्र नी
वंदन हजारु वार छे...3

संसार वाटे चालवा नू  प्रथम पगलू ज्यां भर्यू,
सेवा निहाळी संतनी सत्त धाम मां चितडूं ठर्यू,
पछी'परबे रोकाणा मात अमर
आई नो अवतार छे,
धन्य धन्य धरा सौराष्ट्र नी
वंदन हजारु वार छे...4

साधू जमाडी जमवानू व्रत लीधू वाणिये,
अतिथी काजे कूवर कापी खांड्यू माथू खाणिये,
परिब्रह्म पोते हट्यो पाछो जे धीरजनो धरनार छे,
धनूय धन्य धरा सौराष्ट्र नी वंदन हजारु वार छे...5

जलियाण तारा झूपडे योगी बनीने आवियो,
विरबाई मागी दानमा एणे तपस्वी ने तागियो,
भूदर भाग्यो भगतथी जे धीरज नो धरनार छे,
धन्य धन्य धरा सौराष्ट्र नी वंदन हजारु वार छे...6

डालां मथां ज्या डणंकता ई
गीरमां गीगो वसे,
दर्शन करता दूःख सघळा खलक कोरे थी खसे,
आधी उपाधी व्याधी सघळी
तुरत त्यां टळनार छे,
धन्य धन्य धरा सौराष्ट्र नी वंदन हजारु वार छे..7

भोळानी करवा भेर जेदी हमीर हेल्यो हरखथी,
दिधून डगलू तहूं पाछू तलवार वाळा तरकथी,
सोमनाथ सारु रियो रण मां
दोखी नो दळनार छे,
धन्य धन्य धरा सौराष्ट्र नी वंदन हजारु वार छे..8

दूकाळ पडियो देशमा वरतवा विर आविया,
जवन नजरे पडी जाहल सूमरे सताविया,
तेदि'हमीरने तू हाल्यो हणवा सोरठनो सरदार छे,
धन्य धन्य धरा सौराष्ट्र नी
वंदन हजारु वार छे,..9

विजाने शेणल आई नी वातो
हजी वंचाय छे,
हाथ मागी हजू नाव्यो अंतर
मा अकळाय छे,
हाड हैमाळे गळी आवी मां तणी मनवार छे,
धन्य धन्य धरा सौराष्ट्र नी वंदन हजारु वार छे...10

गाम नमळे गीरमा ज्यां नाना-नाना नेहडा,
परोणा काजे प्राण आपे एवा
अमीर हैया एवडा,
धन धान वाळा पडे ढीला एवा अंतरना उदार छे,
धन्य धन्य धरा सौराष्ट्र नी वंदन हजारु वार छे..11

टिलात तळाजा तणो सत्त साई नेहे आवियो,
माग्य मूखथी कापडूं जगदंब
जिवीत राखियो,
बापे बेटानू शिष काप्यू एवो विरनो वहेवार छे,
धन्य धन्य धरा सौराष्ट्र नी वंदन हजारु वार छे..12

बाकर माटे बाई तूं सरधार मां
भुई सिंहणी,
कमकमी काया कवेण सूणी
बणी क्रोधे बमणी,
मारी पछाडी कर्या कटका जोगणी जमनार छे,
धन्य धन्य धरा सौराष्ट्र नी वंदन हजारु वार छे...13

एभल जायो आटक्यो कमळ विण भारथ कियो,
जश लियण जैताणा धणी तूं शाहनी सामे थियो,
केकाण कविया ने दिधो एवो देहविण दातार छे,
धन्य धन्य धरा सौराष्रट्र नी वंदन हजारु वार छे..14

आहीर केरा आशरे ज्या रा' आवीने रियो,
माथू कापी आंखू कचरीस थीर मन नो थडकियो,
टेक खातर तनूज दिधो ई
यूगल नो उपकार छे,
धन्य धन्य धरा सौराष्ट्र नी वंदन हजारु वार छे..15

बारवटने पाळनारो जवा मर्द जोगो थयो,
वखतसिंहना वखत वखते सिंहना छूपो रियो,
डणक्यो सिहोरा डूंगरे तूं शूर नो शणगार छे,
धन्य धन्य धरा सोराष्ट्र नी वंदन हजारु वार छे,..16

वाळा तणी वावडीमां रण जीतण रामो थीयो,
डोहा पटेले कर्यो डारो त्यां सादूळो सामो थीयो,
मारी पछाडी उभो माथे बंदूक ना ज्यां बार छे,
धन्य धन्य धरा सौरेष्ट्र नी वंदन हजारु वार छे,...17

सवळा पडे जो चीरिया तो प्राण राखे प्रेमथी,
अने अवळा पडेतो एज घडिये
जीव त्यागू देहथी,
निमी तिथी ए निम लिधू हादल नो हूंकार छे,
धन्य धन्य धरा सौराष्ट्र नी वंदन हजारु वार छे...18

क्षत्रीय आगळ चारणे सावज माग्यो जिवतो,
वेण देतो वदू तूने पछी ज पाणी पीवतो,
केहर अर्पयो कान झाली पवित्र परमार छे,
धन्य धन्य धरा सौराष्ट्र नी वंदन हजारु वार छे,..19

कनरे जाता कैक यादी आंख सामे आवती,
महिया मर्दनी खांभियो बधी धीरजने धृजावती,
मान साटूं मोत वालू कोण बिजू करनार छे,
धन्य धन्य धरा सौराष्ट्र नी वंदन हजारु वार छे,..20

मिटूं मळीज्यां मांगडाथी मन वचनथी वरी,
पद्मावती नी प्रीत केवी भूतथी फेरा फरी,
वडले रोकाणी विरल नारी प्रेम पारावार छे,ह
धन्य धन्य धरा सौराष्ट्र नी वंदन हजारु वार छे...21

आघी खहिशमां एक डगलू एम कईने ई गयो,
गळाथ दई गढवी मने जंजीर मां जकडी गयो,
सोगंद तोडे स्वामीना ई धण्य ने धिक्कार छे,
धन्य धन्य धरा सौराष्ट्र नी वंदन हजारू वार छे...22

खांभीपरे आ खेमरानी लोहीं लोडण जारती,
वळजे तूं पाछी वेगथी ई शब्द ने संभारती,
करज्यो न कदिये कोई प्रिती
प्रेमीनो पोकार,
धन्य धन्य धरा सौराष्ट्र नी वंदन हजारु वार छे...23

टहूके मधूरा मोरला ने ओढो कां अकळाय छे
हारेल हैये तोय होथल धीरज देवा धाय छे,
वर्षामां वाला सांभरे ई विश्व नो वहेवार छे,
धन्य धन्य धरा सौराष्ट्र नी वंदन हजारु वार छे...24

आणलदेथी आंख मळता दिल दिधू देवरे,
ढोलरानी  धीरज  आखा परगणा मां परवरे,
एकसाटे बे आपे तोय ढाल नहीं वळनार छे,
धन्य धन्य धरा सौराष्ट्र नी वंदन हजारु वार छे..25

मरशियानी मोज सारु कपट केवू आदर्यू,
साद सूणी चारणीनो थीर हैयू थडकियू,
न्याज रेजे नागाजण हवे तूं मारे मन मरनार छे,
धन्य धन्य धरा सौराष्ट्र नी वंदन हजारु वार छे...26

खांभी निहाळी खंतथी में नेक भड नजराज नी,
यादी थई मूने एज वखते शूर ना सरताज नी,
भल भूप भिमोराधणी ने खमां  खमकार छे
धन्य धन्य धरा सौराष्ट्र नी वंदन हजारु वार छे..27

माणेक जोधो अने मूळू अंग्रेज सामा आटक्या,
ओखा माटे अहराळ थईने
तेग लईने त्राटक्या,
कीधू धींगाणू कृष्ण सारु जे श्यामना सरदार छे,
धन्य धन्य धरा सौराष्ट्र नी वंदन हजारु वार छे...28

ओखा धरामा आई अमणी
बेठी मां बळवान छे,
सरकार साची चारणो नी भै मिटावण भाण छे,
मूगलाने मांडी मारवा जाणे आगनो अवतार छे,
धन्य धन्य धरा सौराष्ट्र नी वंदन हजारू वार छे...29

चंडी चामंडा नू बेहणू ई परगणू पंचाळ छे,
त्रिपूरारी तरणेतरमा भव रोग
नो हरनार छे,
सूरज देवळ शोभतू जाणे श्रृष्टी नो शणगार छे,
धन्य धन्य धरा सौराष्ट्र नी वंदन हजारु वार छे...30

चेतक सरीखा घोडला पंचाळ
मा पाक्या हता,
राजा न राणा गूण गाता जीभ थी थाक्या हता,
हजी हावळ्यू संभळाय जाणे
राणो माथे अहवार छे,
धन्य धन्य धरा सौराष्ट्र नी वंदन हजारु वार छे...31

दातारी एना दिलनी हजू विवेकथी वखणाय छे,
महिपती मोटा पडे भोंठा अमिरो अकळाय छे,
बडभागी बाबी कमाल तारी जीगर ने जूहार छे,
धन्य धन्य धरा सौराष्ट्र नी वंदन हजारु वार छे...32

एक साथे बधा पाधर राष्ट्रने अर्पण कर्या,
अधीकार जातो करी जग मां
अमर किरत ने वर्या,
प्रजा माटे परोपकारी कृष्ण कृष्ण कूमार छे,
धन्य धन्य धरा सौराष्ट्र नी वंदन हजारु वार छे...33

नर नरा कूळमा आवियो कहू केवो ई कविराज छे,
कृष्णभकती मां लिन कायम
सत्तनो शिरताज छे,
कवि पिंगळशीनी कविता महा
मंत्रोच्चार छे,
धन्य धन्य धरा सौराष्ट्र नी वंदन हजारु वार छे..34

शिर मौर चारण वरण नी तूं खरेखर ओळखाण छे,
दाढी वाळा काग दूलां खमीरी नी खाण छे,
काव्य केणी कंठनो भायल सतण भरथारछे,
धन्य धन्य धरा सौराष्ट्र नी वंदन हजारु वार छे..35

संत दाता सती भकतो शूर विर निपजावती,
कैक कवियोनी कलमथी नित गीत रुडा गवरावती,
*दिलजीत* जन्म भोम उपर
ओळ घोळ अवतार छे,
धन्य धन्य धरा सौराष्ट्र नी वंदन हजारु वार छे.36

निजानंद माटे लखायेल आ
कविता खरेखर कोईना वखाण करवा खातर नथी लखी संत शूरविर दातार
पवित्र देवभूमी तेमज संस्कार सभर ईतिहास नी अमर वातो आप सूधी पंहोचाडवानो विनम्र प्रयास छे जे आपने गमशे ई मने पण गमशे कदाच क्षति होय तो मोटू रदय राखी भूलसाथे स्वीकारवा कृपा सारु तमारु बाकी बधू मारु
*जै सौराष्ट्र*
*दिलजीत* *बाटी* ना
रदयथी जै माताजी *ढसाजं.**मो.9925263039*

सुर्य वंदना रचना :- जोगीदान गढवी(चडीया)

.               *सुर्य वंदन सपाखरु*
काळा वादळा हठाळा माळा,गाळा गरजाळा मळी, त्रांणीया बांधीया गोढ तीमीराळा तांण.
त्यांतो
आवीयो सादूळो सूर त्राटक्के अजा रे टोळ, ओळे घोळे कोळे बुक्का अंधकारा आंण.

भांगीया खेखट्ट जट्ट पट्ट अंधकारा जोगा, भळक्के डणंके भळेळाट उग्यो भांण.
जळक्के ढळक्के तेज तिमीराळा त्रागा त्रागा, वागा हथ लागा सातो कुदीया केकांण

चडीया न चुके पथ पडीया कीताक्क पाणां,
नांणा नत टांणा पूरो निकळे नवांण
जांण जोगीदांण भांण खरो म्रदायु री खांण
वांण वरदांण करां धरंतो क्रीपांण

भगवान सुर्य नारायण ने मारां नित्य वंदन छे

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माणसने कहेवुं पडे छे के तुं माणस था. प्रस्तुति कवि चकमक ( जीलुभाई सिल्गा )

माणसने कहेवुं पडे छे के तुं माणस था...!

गामडा गाममां बळदने कोहे जोडे ऐटले पयाना मापनी खबर पडे. पंदर डगला हाल्यो छुं ऐटले कोह आवी गयो हशे. सोळमुं डगलुं बळद नो हाले. माथु आम नमावे त्यां कोह ठववाई जाय. बळदने खबर पडे छे के आगळ नो जवाय. अने आ माणह भटकाय नहीं त्यां सुघी पाछो नो वळे.
आमां बळद सारो के माणस सारो ? बळदने तमे खीले बांघशो तो तोडावशे नही बोलो..! ऐने खबर छे के मारो मालिक बांघीने गयो छे. मने पाणी पीवडावे छे, खड खवरावे छे. मारे तोडावाय नहीं. माणसने आपणे माणेकचोकमां उभो राखीऐ तो ते बसस्टेन्ड मोर पूगे. आपणने पाछो कहे तमे त्यां नो आव्या ते हुं आई आव्यो. हा हवे मर, तुं हवे अमारी हारे मर.
आमा बळद सारो के माणस सारो ? बळद जुगार रमे ? तो के ना. मरद रमे. गायुं फिलम जोवा जाय ? तो के ना. बायु जाय..!

स्व हरसुर गढवीनुं साहित्य.

कवि भरत उमिॅल कहे छे,

नथी हसरत मने दिलमां कोई महान बनवानी,
चाही सुख-संपति केवळ महाघनवान बनवानी.
बनी सहभागी हुं सौनो खुशी-गम थोडां वहेंचीने,
उरे अभिलाष छे ऐक ज फकत ईन्सान बनवानी.

जय माताजी.

प्रस्तुति कवि चकमक.

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