ચારણત્વ

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ગુરુવાર, 18 ઑગસ્ટ, 2016

"हेम तिर्थ" हेमु गढवी स्मारकनुं भव्य लेकार्पण

पाकिस्तानमां वस्ता चारणोनी माहिती

जय माताजी

पाकिस्तान में चारणो के गांव

पाकिस्तान में चारणो के गाव  किस किस गांव में कितने घर हैं और किस जाती के चारण रहते है  ये जानना हम सब के लिए बहुत ही जरुरी है। मेने जानकारी प्राप्त की है।
अपने पाकिस्तान में रह रहे चारणो से अपने चारण समाज के लोग जो किस किस गाव में कितने कितने घर है जो इस प्रकार है--
पाकिस्तान में

1- राठी गाव में मइया के साठ घर है जिनका तीन परिवार है केसरानी, खनाणी और रुघाणी,
रोहड़िया का एक घर है हजानी परिवार,
और एक महेडुओ का घर है पीरदान/ पूजदान जी महेड़ू।

2- भिमावेरि में देथा है जो तीन परिवार है एक दलानी, पूजानी और चमनाणी,

3- गढ्डा में देथा के तीन घर है एक हरदानजी, मघदानजी और भुरदानजी।

4- डीनसी में सौदा जाती के चारण रहते है जो दो भाई है केसुदानजी और मोहबतदानजी,

5- उनडेर में विठू का एक घर है भूमिदान सामलदानजी

6- देदलाइ में सुरतानिया के 5 घर और झिबा के 8 घर है। झीबा खोड़ानी और और सुरतानिया सरूपाणी परिवार।

7- पाबूहर में देथा 10 घर और रोहड़िया के 10 घर रहते है और एक घर घुवडो का है। देथा नेताणी कहलाते है और घुवड तुलछदानजी नवलदानजी है जो छाय का है।

8- चारणहोर में देथो के 10 घर और झिबो के 12 घर और सुरतानियो का 1 घर है जो झिबा सवाणी कहलाते और देथा का पता नहीं है सा और सुरतानिया खुमदान जी इनके पिता जी का नाम पता नहीं है जी।

9- खारोडा में देथा के 10 घर, कनिया के 10 घर, बारहटो के 5 घर, घुवडो के 8 घर है और मुझे परिवार पता नहीं है सा सिर्फ एक परिवार कनिया का पता है चुनाणी परिवार है।

10- न्यू छोर में 20 घर देथा और बारहट है
टोटल मिलकर 250 घर होंगे पाकिस्थान में चारणों के।

भवरदान महेड़ू साता (गांधीधाम) 9913083073.

કવિ દાદ ની અનમોલ રચના

કવિ દાદ ની અનમોલ રચના:

બગાડજે મા તું કોઈ ની બાજી અધવચે કીરતાર ,
સામસામા ભળ આફળે એમા,
મરવું ઈ મરદાઈ રે,
માથળા મા ભલે ગોળીયુ વાગે,
પણ એની પીઠ ન વિંધાઇ જાઈરે,
બગાડજે મા તું કોઈ ની બાજી અધવચે કીરતાર ,

ધુધરીયાળી વૈલ મા બેઠી,
મુખડામાં મલકાઇ રે,
એના ચોખલીયાળા ચાંદલા નું
જોજે કંકુ નો ભુસાઇ રે,
બગાડજે મા તું કોઈ ની બાજી અધવચે કીરતાર ,

રજ લુવા રઈ જીવતી જેની ,
જુરતી જનેતા ઈ રે,
કોઈના લાડકવાયા ની ખાંભીયુ
ઉપર મહેલ નો ચણાય જાઇ રે,
બગાડજે મા તું કોઈ ની બાજી અધવચે કીરતાર ,

બાંધેલ ભેટે એને બળવા દેજે,
જેના આતમ છે ઉજળાય રે,
'દાદ' જોજે કળીયુગ ના કરમ,
એને જોજે ન છેતરી જાઈ રે,
બગાડજે મા તું કોઈ ની બાજી અધવચે કીરતાર ,

બુધવાર, 17 ઑગસ્ટ, 2016

भगवती आई श्री जीवा मां ( लाखीयारविरा) जीवन वृतांत

भगवती आई श्री जीवा मां ( लाखीयारविरा) जीवन वृतांत आपनी समक्ष PDF स्वरुपे मुकववा नो नानकडो प्रयास करेल छे. 


भगवती आई श्री जीवा मां ( लाखीयारविरा) जीवन वृतांत पुस्तक आपवा बदल वडील श्री मोरारदानभाई सुरताणीया नो खूब खूब आभार

भगवती आई श्री जीवा मां ( लाखीयारविरा) जीवन वृतांत डाउनलोड करवा माटे :-  Click Here

ख़ास नोंध :- बेस्ट व्यु माटे हंमेशा Google Chrome ब्राउझरमां ज ओपन करो

       *जय जीवा मां*
       *वंदे सोनल मातरम*

શુક્રવાર, 22 જુલાઈ, 2016

हे चारणी

*______|| झळहळतो जीवनमंत्र ||_______*

हे चारणी सुख कारणी ! ब्रह्मचारणी आये शरण .
सच्चिदानंदे शारदे मंगलमयी प्रणमे शरण .
..... हे चारणी .....

अंबिके आवड आशापुर्णे , है तुम्हारे बाल हम .
जगतारणी अधहारणी , कुरु प्रणत की प्रतिपाल तुम.
..... हे चारणी .....

हम क्यो पतीत हो गये , जब हो पतीत पावनी मात तुम .
हम क्यो अशांत अरु-असुचि जब हो,शांति सुचिंदा मात तुम.
..... हे चारणी .....

पुर्वज सदश नीति पथीक हो , मातृभुमि के भक्त हम.
शुरे-उदार अरु सत्य वक्ता , अमृतमयी अनुरक्त हम .
..... हे चारणी .....

द्रढविर वृती सेवक बने , अरु पढे शम-दम पाठ हम .
अग्नि परीक्षा मे अडिग बन , बढे संयम बाट हम.
..... हे चारणी .....

यम यातना हो नर्क-दु:ख , कर्तव्य पथ छोडे न हम .
दम-दम तिहारा जप जपे , मर-मीटे मुख मोडे न हम .
..... हे चारणी .....

आशिष उच्चरो अन्न पुर्णे , श्री चरण मे लीन हो हम .
हम हदय सिंचो अमृत "सोनल" प्रेममयी लागी लगन .
..... हे चारणी .....

*रचयीता :- परम पूज्य आई श्री सोनल मां ( मढडा )**

*टाईप :- महेशदान गढवी नरोडा*

टाईपमां भुल होयतो बंधु क्षमा करजो

         🏻वंदे सोनल मातरम्

સોમવાર, 2 મે, 2016

कवि श्री दाद नी रचना :- रवराय लाजु राखवा

कवि श्री दादनी रचना :- रवराय लाजु राखवा

तुं हाल्य ने जट होय त्यांथी कोई वा'रु नहि कने ,
वाटुं नरखता वावडे मा तलखता छोरु तने ,
उभी न रहेजे अेक घडीअे धाबळी लई धोडजे,
रवराय लाजुं राखवा अण वखत वहेली आवजे .

भुला पड्या भव सागरे अम गळा लग डुबी गया ,
छेटा थया तुजथी अने तव आंख थी अळगा रह्या ,
हेते लंबावी हाथ मा कांठे बधांने काढजे ,
रवराय लाजुं राखवा अण वखत वहेली आवजे .

जे आंगणां जोवां न'तां त्यां जाचवा जावुं पड्युं ,
जे करम नहि अम पूर्वजो नुं अे करवुं पड्युं ,
अकरम अने अविचार सघळा मावडी मुकावजे ,
रवराय लाजुं राखवा अण वखत वहेली आवजे .

सोड्य ताणी सूई गई के घेन मां घेराई गई ,
पांपणे चडीया पडोळे के घडपणे लेवाई गई ,
तोय लाकडी टेको लई उतावळे जट आवजे ,
रवराय लाजुं राखवा अण वखत वहेली आवजे .

सागर भले सुकाओ पण अमी झरण तव खुटो नहि ,
हवे बांय झाली मावडी मजधार मां मुको नहि ,
कहे "दाद" छोरु मातना संबंध ने संभाळजे ,
रवराय लाजुं राखवा अण वखत वहेली आवजे .

रचयता :- कवि श्री दाद
टाईप :- मनुदान गढवी

       वंदे सोनल मातरम्

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