ચારણત્વ

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રવિવાર, 25 સપ્ટેમ્બર, 2016

आई श्री सोनल वंदना : रचना :- दिलजीतभाई गढवी

*आई  श्री  सोनल  वंदना*
             "चरज"
ढाळ..काळजा केरो कटको..

आई करुछू अरजी मारो साद कां सूणे नई,
क्या अपराधे करणी अम थी मूखने म्रोडी गई;
आई करुछू अरजी मारो...टेक

होय हजारु बाळना गूना पण जननी जूवे नई,
धाह सूणे त्या ध्रोडती आवे घटमां घांघी थई,
आई करुछू अरजी मारो...1

गण तारा अवगण अमाणां त्राजवे तोळीश नई,
अंध लंपट अने नफट छोरुना
खाता खोळीश नई;
आई करुछू अरजी मारो...2

माक करीदे मावडी हवे नवा करशू नई,
कीधा गूनाने विहरी जई राखो शरणे राजी थई;
आई करुछू अरजी मारो...3

मढडा वाळी मात आवो हवे आई अवतारु लई,
राह भूलेलाने वाळजे वाटे दिलथी डारो दई;
आई करुछू अरजी मारो...4

मिट मंडाणी मढडे बिजे चितडूं चोंटे नई,
मां विना मोटा देवना गूणला गावा गोठे नई;
आई करुछू अरजी मारो...5

शिव-ब्रह्मा-हरी भूले भले पण
मात तूं मेलीश नई,
मां विहोणा देवना *दिलजीत* देवळ दिठ्या नुई;
आई करुछू अरजी मारो...6

आई श्री सोनल वंदना
दिलजीत बाटी ढसा जं. ना
जै माताजी ।।मो.9925263039॥

मां रवेची वंदना : रचना :- दिलजीतभाई गढवी

*मां    रवेची    वंदना*

॥झालावाडी-मणीयारो॥

ढाळ..हारे भरमलरा भाटिया..

हांरे रवेची मां रवनी राजा सूणजे मारो साद,
नाम गूंजे नवखंडमां तारु हूं आई करुछू याद, रवेची..टेक

वहमां टाणे वेगथी आवी ईज मोटो उपकार,
वाना वधारण विह भूजाळी आई लई अवतार रवेची,..1

धींगो धणी तूं कच्छ धरानो रवमां छो रवराय,
आई वडी वागड बिराजे जाणी तूने जगराय रवेची...2

रव वागडमां मावडी तारी आवडी मोटी आण,
वाये कदी ना पवन शियाळू
ऐनी जग आखाने जाण रवेची..3

कूळ नरानी कूळदेवी तूने नमण्यूं करिये नाथ,
राह भूलेलाने मारगे लावो हेतथी झालीन हाथ रवेची..4

आई सवारी सिंहनी सोहे हाथ ताती तलवार,
भै-मिटावण भेळिया वाळी खंते करो खंम्मकार रवेची..5

आई अमीनो विरडो मोटो मां वालपनो वरसाद,
स्नेह सरवाणी शरणे तारे प्रेमे पामे प्रसाद रवेची...6

दिलथी गावे *दिलजीत* बाटी
भगवतीनो भाव,
सत्त चूके नय छोरु चारणना ऐवी रव वाळीने राव रवेची..6

*रवनी राजा आई रवेची मां*
*आई आराधना स्तूती*
दिलजीत बाटी ढसा जं. ना
जै रवराय
मो..9925263039

શનિવાર, 24 સપ્ટેમ્બર, 2016

शुं पुछो छो मुजने हुं शुं करुं छुं : रचना दास सतार

*दास सतारनी एक रचना*

*शुं पुछो छो मुजने हुं शुं करुं छुं*

शुं पुछो छो मुजने हुं शुं करुं छुं .
मने ज्या गमे , त्यां हरुं छुं फरुं छुं .

न जाउं न जाउं कुमार्गे कदापि .
विचारी विचारी ने , डगला भरुं छुं .
मने ज्या गमे , त्यां हरुं छुं फरुं छुं .

करे कोई लाखो , बुराई छतां हुं .
बुराईना बदले , भलाई करुं छुं .
मने ज्या गमे , त्यां हरुं छुं फरुं छुं .

नथी बीक कोईनी , मने आ जगतमां .
फक्त मारा प्रभूथी एक ज डरुं छुं .
मने ज्या गमे , त्यां हरुं छुं फरुं छुं .

चडी छे खुमारी पीधी छे प्रेम सुरा .
जगतमां हुं प्रेमी थई थईने विचरुं छुं .
मने ज्या गमे , त्यां हरुं छुं फरुं छुं .

छे साधु संवत *भक्त* सत्तारनुं .
कवि ज्ञानीओने हुं शरणे धरुं छुं
मने ज्या गमे , त्यां हरुं छुं फरुं छुं .

आई श्री मोगल वंदना : रचना :- दिलजीतभाई गढवी

*आई श्री मोगल मां वंदना*
              *चरज*           
          ॥मणियारो॥
ढाळ..मारु संदेशो मोकले रे..

नित सवारे सांज बपोरे प्रेम थी लागू पाय,
भूल भूली तव बाळनी भेरे आवजे वेगे आई,...1

आसमाने मोजा आफळे मोटा
वावडो वेरी वाय,
हालक डोलक होडकूं ऐमा
थर आतम केम थाय,...2

हिंचके हाले वादळो भेळो वीज तणो गगडाट,
दरियो गांडो थईने गाजे
विपत्ते घेरी वाट,..3

वळी मंडाणो मेहूलो माथे काळी अंधारी छे रात,
नजर नाखे नथी मळतो केडो
ने अंतरमा उत्पात,...4

धीर खूटी हवे ध्रोडजे मोगल
उतावळी थईने आई,
*बाटी दिलजीत ने* बचावजे
माडी बाळ जाणीने बाई,..5

*मां मोगल वंदना*
दिलजीत बाटी ढसा जं. ना
जै माताजी
*मो.9925263039*

શુક્રવાર, 23 સપ્ટેમ્બર, 2016

जोगीदान गढवी (चडीया) कृत चारण निति सतक ना दोहरा

*प्रेम भावे थी पिरहियुं, उतरे कोठे अन्न*
तो
*मांणह केरुंय मन्न, जुमवा मांडे जोगडा*

( जो घरमां शांति मय वातावरण ईच्छता होव तो स्त्रीयोये घरना तमाम सभ्यो ने खुब प्रेम भावथी भोजन पीरही ने जमाडवुं, जेनाथी बधानुं  मन झुमी उठसे, आ निति बघे लागु पडे छे)

*चूको कदी ना चारणा, वांणी उपर विवेक*
*आप बळुकी एक, जीभ अमांणी जोगडा*

(चारणोये क्यारेय पोतानी वांणी पर थी संयम न चुकी ने विवेक पुर्ण वातज करवी, कारण के चारण नी जीभ बहु बळवान होय छे,अने अ विवेकी वांणी अणधार्या परिणामो ने नोतरनार होय छे)

*कदिय न ककळाववी, आंतरडी ने  ऐम*
*राखी सौ पर रेम, जीवन सुधारो जोगडा*

(क्यारेय कोईनी आंतरडी न ककळाववी के न आपडी आंतरडी ककळवा देवी, कारण के जो कोकनी आंतरडी ककळे तो आपणी बुराई बेहे, ने जो आपडी चारण नी आंतरडी ककळे तो सामेना नो वंश वेलो मुळथी उखड़ी जाय, माटे सौ पर दयाभाव राखी ने चारणे देव कोटीनुं जीवन व्यतित करवुं )

*ठारो काळज ठाकरा, तो, सोनल रेसे साथ*
*हजार ऐना हाथ,ईतो, जाय ओवारी जोगडा*

(कोक ना काळजां ठारस्यो तो मा सोनबाई सदाय साथे रहेसे, अने एटलुंज नई ए एटली राजी थसे के एना हजारो हाथ थी तमारा ओवारणा लेशे )

*आखुं दळ हो आंधळुं, तो एमा, कांणो राजा कोक*
*मळसे एवाय मोक, पण, जरी न चळवुं जोगडा*

(क्यारेक एवा मोका पण हसे के ज्यारे आखु कटक आंधळु हसे पण गोतवा जतां एनो राजाय कांणो मळे, कोय वाते समजता न होय तेवुं बने तो पण चारणे चलीत थई ने पाता पणुं न गुमाववु )

*(जोगीदान गढवी चडीया कृत चारण निति सतक ना दोहरा)*

आई श्री सोनल वंदना : रचना :- दिलजीतभाई गढवी

*आई  श्री  सोनल  वंदना*
            " *भाव* "
राग..जन्म जन्म का साथ है...

जै सोनल मां सूख कारी मंगल मूरती वाळी,
मढडानां मंदिरमां सोहे आयल आभ कपाळी,
जै सोनल मां सूखकारी...टेक.

चारण तारण कारण जनम लई जोराळी,
कफरा आ कळी काळमां आखी अवन उजाळी,
मोड सधू महमाया खंम्मा हमीर धीडी हेताळी सोनल मां सूखकारी मंगळ मूरती वाळी .1

भूल भूली जा भावथी मां मारी मरमाळी,
होय हजारु गूना बाळकना बिरदाळी,
कदी करीशना कोई गूना हूं नवा हवे नेजाळी सोनल मां सूखकारी मंगळ मूरती वाळी.. 2

हानी हरवा हेतथी आवोने अवतारी,
चित्त चड्यू चकडोळे मूंजाई छे मत मारी,
आंधीमां अटवायो कांठो जडशे केम कृपाळी सोनल मां सूखकारी मंगळ मूरती वाळी.. 3

कोरट तूं छो कायदो न्याय वडो नेजाळी,
छोरु जाणी *दिलजीतने*
माफ करो मरमाळी,
अरज गूजारु चरजमां मूने झट लेजो संभाळी सोनल मां सूखकारी मंगळ मूरती वाळी. 4.

*आई  श्री  सोनल  वंदना*
देस राग आधारीत मां प्रार्थना
*दिलजीत बाटी ना जै माताजी* *ढसा जं.*
*मो.9925263039*

ગુરુવાર, 22 સપ્ટેમ્બર, 2016

आई श्री पीठड मां नी चरज : रचना :- दिलजीतभाई गढवी

*आई  श्री  पीठड  मां*
            *चरज*
राग..हालीरै ऐ हालीने मारा....

भेलडिये ऐ भूजाळी बेठी बाटी कूळ बीरदाळी जो विघन ऐ हरोने वडहथ वाळीरे
ऐ सोयानी पीठड वेली करजे वारुजो...टेक..

अरणा ऐ अहवारी हाथे हेमनी लाकडी वाळीजो,
मां खाडूं रे लावनारी तूं खमकारी रे ऐ सोयानी पीठड वेली करजे वारुजो....1

जाहलनी ऐ वारे हाल्यो जूनाणानो राजा जो,
तेदी' दरियाने ऐ पीधो तेंतो दयाळी रे ऐ सोयानी पीठड वेली करजे वारुजो....2

नावलडी ऐ नोधारी वावडो वेरी लाग्यो वा'वा जो,
मने वमळेथी ऐ बचावो वालप वाळी रे ऐ सोयानी पीठड वेली करजे वारुजो...3

*दिलजीत* ने ऐ भरोंसो तारो भारी लेळिया वाळी जो,
मां छोरुनी ऐ राखो नित रखवाळी ऐ सोयानी पीठड वेली करजे वारुजो...4

            *दूहो*
तूं विना त्री लोकमां ऐके नही आधार,
हवे' वेली करजे वार पोताना जाणीन पीठबाई,

    आ चरज अमारा कूळदेवी
*आई  श्री  पीठड  मां*
नो मढ भेला' भेलडी' अने बाबरियात आ त्रणे गाम ऐकज बापूना वंश वारसदार ना छे *मूळ गाम भेला* उपरथी  *भेवलिया-बाटी*अमारी शाखा छे आ त्रणे गामनो मढ ऐकज गाम भेलडी मा छे जे आ चरज भेलडिये भूजाळी एवू लख्यू छे आपनी जाण माटे
*दिलजीत बाटी ढसा जं.*
ना जै माताजी मो 9925263039

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શ્રી ચારણ (ગઢવી)સમાજ સેવા ટ્રસ્ટ રાજકોટ દ્વારા આયોજીત 31 મો સમુહ લગ્ન મહોત્સવ

શ્રી 1! શ્રી ગણેશાય નમઃ આઈશ્રી સોનલ માં નમઃ !! ચારણ સમાજ જોગ સંદેશ !!        જય માતાજી શ્રી ચારણ (ગઢવી)સમાજ સેવા ટ્રસ્ટ રાજકોટ ...